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अमेरिका मिडटर्म चुनाव: 120 वोटिंग सेंटर पर सुरक्षा तैनात, 5 बातें जो आपको जाननी चाहिए

Published: Tue, 03 Nov 2026 07:41 PM (IST)

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के लिए मतदान जारी है, जो राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल के अंतिम दो वर्षों में कांग्रेस पर नियंत्रण तय करेगा।

US में मिडटर्म इलेक्शन के लिए वोटिंग जारी।

US में मिडटर्म इलेक्शन के लिए वोटिंग जारी।

HighLights

  1. मिडटर्म चुनाव से अमेरिकी कांग्रेस का नियंत्रण तय होगा।

  2. ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर भी इन चुनावों का असर।

  3. 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की दिशा भी होगी निर्धारित।

डिजिटल डेस्क वाशिंगटन। अमेरिका के कई राज्यों में मतदान जारी है। अमेरिकी नागरिक मिडटर्म चुनाव में वोटिंग कर रहे हैं। इन चुनावों से यह तय होगा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के कार्यकाल के आखिरी दो सालों में कांग्रेस पर किसका नियंत्रण रहेगा।

कई राज्यों में चुनाव जारी

कनेक्टिकट, इंडियाना, केंटकी, मेन, न्यू हैम्पशायर, न्यू जर्सी, न्यूयॉर्क और वर्जीनिया जैसे राज्यों में वोटिंग शुरू हो गई है। ये चुनाव राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल के दूसरे चरण पर देशव्यापी जमानत की तरह होंगे।

इससे पता चलेगा कि क्या मतदाता डेमोक्रेट्स को कांग्रेस के एक या दोनों सदनों का नियंत्रण सौंपकर ट्रंप की शक्तियों को सीमित करना चाहते हैं, या फिर वे रिपब्लिकन्स को ही सत्ता में बनाए रखना चाहते हैं।

यह फैसला ऐसे समय में हो रहा है जब लोग बढ़ती जीवन-लागत और ईरान के साथ अमेरिका के नेतृत्व वाले संघर्ष को लेकर चिंतित हैं।

इन चुनावों के नतीजे दोनों पार्टियों के अंदर उन नीतियों और संदेशों पर होने वाली बहस को भी दिशा दे सकते हैं, जो 2028 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले मतदाता को प्रभावित कर सकते हैं।

मिडटर्म चुनाव में कांग्रेस पर नियंत्रण होगा तय

इस समय कांग्रेस के दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी को बहुत मामूली बढ़त हासिल है। प्रतिनिधि सभा की 435 सीटों में से रिपब्लिकन के पास 218 और डेमोक्रेट्स के पास 214 सीटें हैं (1 निर्दलीय)। वहीं सीनेट की 100 सीटों में से रिपब्लिकन के पास 53 और डेमोक्रेट्स के पास 47 सीटें हैं (इंडिपेंडेंट सहित)।

संसद का नियंत्रण पलटने के लिए डेमोक्रेट्स को दोनों सदनों को मिलाकर केवल चार सीटों का शुद्ध फायदा चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निचले सदन में डेमोक्रेट्स की वापसी की प्रबल संभावना है, जबकि सीनेट में मुकाबला बेहद कड़ा और कांटे का है।

यदि डेमोक्रेटे्स किसी एक सदन में भी जीत दर्ज करते हैं, तो वे ट्रंप प्रशासन की इमीग्रेशन नीतियों ईरान संकट से निपटने के तरीकों और नैतिक आचरण की व्यापक संसदीय जांच शुरू कर सकते हैं। वहीं अगर रिपब्लिकन दोनों सदनों में अपनी पकड़ बनाए रखते हैं, तो ट्रंप की नीतियों को नई ताकत मिलेगी।

मतदान केंद्रों और मतगणना के दौरान आने वाली समस्याएं

चुनाव अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि कड़े मुकाबले की स्थिति में मतदाताओं की पात्रता, वोटों की गिनती और नतीजों के प्रमाणीकरण को लेकर विवाद हो सकते हैं।

लंबी कतारें, मशीनों में खराबी और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए सवाल कानूनी विवादों को जन्म दे सकते हैं, जिससे नतीजों में देरी हो सकती है।

न्याय विभाग पूरे देश में लगभग 1000 चुनाव पर्यवेक्षकों को तैनात करने की योजना बना रहा है। यह संख्या पिछले मिडटर्म चुनाव में तैनात किए गए पर्यवेक्षकों की तुलना में लगभग तीन गुना है। कुछ स्थानीय अधिकारियों को डर है कि इनकी मौजूदगी से मतदाता डरे हुए महसूस कर सकते हैं, हालांकि विभाग ने इन चिंताओं को खारिज कर दिया है।

अधिकारी और कानूनी विशेषज्ञ इस बात पर भी नजर रख रहे हैं कि क्या कोई संघीय जांच या कानूनी चुनौती सामने आती है, जो चुनाव नतीजों के आधिकारिक प्रमाणीकरण में बाधा डाल सकती है। कई राज्यों में चुनाव की रात तक पूरे नतीजे आने की संभावना कम है, खासकर उन जगहों पर जहां मुकाबला कड़ा है। इससे आगे चलकर और विवाद पैदा हो सकते हैं।

नतीजों पर ट्रंप की प्रतिक्रिया पर सबकी नजर

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है का विषय है कि चुनाव परिणाम आने के बाद ट्रंप का रुख क्या रहेगा। ट्र्ंप प्रशासन ने पहले ही राज्यों से मतदाता सूची का डेटा मांगा है और गैर नागरिकों द्वारा मतदान के आरोपों को लेकर कैलिफोर्निया राज्य पर मुकदमा दायर किया है।

विश्लेषकों का मानना है कि अगर रिपब्लिकन पार्टी किसी सदन में नियंत्रण खोती है, तो चुनाव प्रक्रिया और वोटों की गिनती की वैधता को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और कानूनी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।ॉ

2020 में उन्होंने वोटों की गिनती पूरी होने से पहले ही अपनी जीत की घोषणा कर दी थी और गिनती रोकने की मांग की थी। जो बाइडेन से हारने के बाद भी, उन्होंने लगातार यह झूठा दावा किया कि चुनाव में धांधली हुई है। उनके समर्थकों ने बाइडेन की जीत के सर्टिफिकेशन को रोकने के लिए 6 जनवरी, 2021 को अमेरिकी कैपिटल पर हमला कर दिया था।

सर्वे में डेमोक्रेट्स को ज्यादा समर्थन

दोनों पार्टी के मुख्य समर्थकों का मतदान प्रतिशत निर्णायक साबित हो सकता है। ओपिनियन पोल के मुताबिक चुनाव के दिन के करीब आते-आते रिपब्लिकन की तुलना में डेमोक्रेट्स वोट डालने को लेकर कहीं ज्यादा उत्साहित थे।

हालांकि, ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो राष्ट्रपति चुनावों की तुलना में मिडटर्म चुनाव में युवा, अश्वेत और हिस्पैनिक मतदाताओं की भागीदारी कम रही है। सर्वे बताते हैं कि इन समूहों के मन में दोनों पार्टियों को लेकर काफी संदेह है, खासकर महंगाई के मुद्दे पर।

अगर इन समूहों का मतदान प्रतिशत उम्मीद से कम रहता है, तो डेमोक्रेट्स का प्रदर्शन खराब हो सकता है।

2028 के राष्ट्रपति चुनाव पर असर संभव

यह चुनाव केवल वर्तमान सत्ता संतुलन का फैसला नहीं करेगा, बल्कि 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की रूपरेखा भी तय करेगा। डेमोक्रेट्स में यह साफ होगा कि पार्टी का भविष्य वाम झुकाव वाले लोकलुभावन एजेंडे में है या मध्यमार्गी (Centrist) रुख में।

वहीं रिपब्लिकन पार्टी के अंदर यह तय होगा कि ट्रंप का प्रभाव आगे भी पूरी तरह हावी रहेगा या पार्टी को अपनी रणनीतियों पर दोबारा विचार करना पड़ेगा।

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