विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हिंदूफोबिया की निंदा करने वाले प्रस्ताव का अमेरिकी सांसद ने किया समर्थन, वैश्विक मंच पर हिंदुओं की बड़ी जीत

Published: Wed, 03 Jun 2026 02:05 AM (IST)

अमेरिका के भारतवंशी सांसद रो खन्ना ने प्रतिनिधि सभा के उस प्रस्ताव का सोमवार को समर्थन किया है, जिसमें अमेरिकी ...और पढ़ें

हिंदूफोबिया की निंदा करने वाले प्रस्ताव का अमेरिकी सांसद ने किया समर्थन (फोटो- एक्स)

हिंदूफोबिया की निंदा करने वाले प्रस्ताव का अमेरिकी सांसद ने किया समर्थन (फोटो- एक्स)

HighLights

  1. डेमोक्रेट सांसद श्री थानेदार ने जनवरी में पेश किया था यह प्रस्ताव

  2. राजा कृष्णमूर्ति, सुहास सुब्रमण्यम सहित 32 सांसद कर चुके हैं समर्थन

पीटीआई, वाशिंगटन। अमेरिका के भारतवंशी सांसद रो खन्ना ने प्रतिनिधि सभा के उस प्रस्ताव का सोमवार को समर्थन किया है, जिसमें अमेरिकी अर्थव्यवस्था में हिंदू-अमेरिकी समुदाय के योगदान की सराहना की गई है और हिंदुओं के प्रति घृणा (हिंदूफोबिया), हिंदू-विरोधी कट्टरता तथा हिंदू समुदाय के मंदिरों पर हमलों की निंदा की गई है।

यह प्रस्ताव मिशिगन से डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद श्री थानेदार ने 24 जनवरी को पेश किया था। राजा कृष्णमूर्ति और सुहास सुब्रमण्यम सहित 32 सांसद इस प्रस्ताव का समर्थन कर चुके हैं।

कैलिफोर्निया का प्रतिनिधित्व करने वाले डेमोक्रेट सांसद खन्ना ने इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट किया, मुझे श्री थानेदार के प्रतिनिधि सभा में पेश प्रस्ताव को सह-प्रायोजित करने पर गर्व है।

यह प्रस्ताव अमेरिका में हिंदू-अमेरिकी समुदाय के निरंतर योगदान और उसकी जीवंत विविधता की सराहना करता है। प्रस्ताव में कहा गया है कि हिंदू धर्म दुनिया के सबसे बड़े और सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है तथा 100 से अधिक देशों में 1.2 अरब से अधिक हिंदू हैं।

हिंदू धर्म में विविध परंपराएं और आस्था प्रणालियां समाहित हैं जिनमें स्वीकार्यता, परस्पर सम्मान और शांति जैसे सार्वभौमिक मूल्य निहित हैं।

प्रस्ताव के अनुसार, अमेरिका ने दुनियाभर से आए 40 लाख से अधिक हिंदुओं का स्वागत किया है जो अलग-अलग नस्लीय, भाषायी और जातीय पृष्ठभूमि का प्रतिनिधित्व करते हैं। हिंदू-अमेरिकियों के योगदान से अमेरिका की अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र को काफी लाभ हुआ है।

हिंदू-अमेरिकियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था और विभिन्न उद्योगों में अहम योगदान दिया है तथा हिंदू परंपराओं एवं प्रथाओं ने दर्शन, आयुर्वेद, कला, संगीत, नृत्य, फैशन, ध्यान, योग और सामुदायिक सेवा के माध्यम से अमेरिकी समाज को समृद्ध किया है।

प्रस्ताव में अमेरिका में बढ़ती हिंदुओं के प्रति घृणा, हिंदू-विरोधी कट्टरता, नफरत और असहिष्णुता की निंदा करते हुए कहा गया है कि देश में सकारात्मक योगदान के बावजूद हिंदू-अमेरिकियों को अपनी विरासत और प्रतीकों को लेकर रूढ़ धारणाओं तथा दुष्प्रचार का सामना करना पड़ता है।