वाशिंगटन, प्रेट्र।  आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस्तेमाल के लिए  अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय पैनल से हाथ मिलाया है ताकि इसके गाइडलाइंस निर्धारित कर सके। इससे पहले ट्रंप प्रशासन द्वारा इस आइडिया को खारिज कर दिया गया था। व्हाइट हाउस के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर माइकल क्रैटसियोस ( Michael Kratsios) ने गुरुवार को एपी से बताया कि चीन द्वारा टेक्नोलॉजी में हेर-फेर के  रिकॉर्ड के खात्मे के लिए इस तरह के साझा लोकतांत्रिक सिद्धांतों को स्थापित करना महत्वपूर्ण है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को लेकर नैतिक दिशा-निर्देश निर्धारित करने के लिए अमेरिका एक अंतरराष्ट्रीय पैनल में शामिल हो गया है। उन्होंने कहा, ‘चीनी प्रौद्योगिकी कंपनियां संयुक्त राष्ट्र में चेहरे की पहचान (Facial Recognition) और निगरानी को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानकों को आकार देने का प्रयास कर रही हैं।’ गुरुवार को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी मंत्रियों के बीच एक वर्चुअल मीटिंग हुई। ऐसा तब हुआ जब लगभग दो साल पहले कनाडा और फ्रांस के नेताओं ने घोषणा की थी कि वे मानवाधिकारों, समावेश, विविधता, नवाचार और आर्थिक विकास के साझा सिद्धांतों के आधार पर एआई का जिम्मेदार मार्गदर्शन करने के लिए एक समूह का गठन कर रहे हैं।

इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने उस दृष्टिकोण पर आपत्ति जताते हुए तर्क दिया था कि विनियमन पर बहुत अधिक ध्यान देने से अमेरिकी नवाचार में बाधा आएगी। क्रैटसियोस ने कहा कि पिछले साल की बातचीत और समूह के दायरे में बदलाव के कारण अमेरिका इसमें शामिल हो गया।

बोस्टन यूनिवर्सिटी में कप्यूटर नैतिकता पर केंद्रित एसोसिएट प्रोफेसर के मैथिसन ने कहा, ‘अमेरिकी तकनीकी फर्मों की वैश्विक भूमिका और मानव अधिकारों के लिए ऐतिहासिक वकालत की बड़ी भूमिका के कारण इसमें अमेरिकी भागीदारी महत्वपूर्ण है।’ 

नागरिक स्वतंत्रता को खतरा पैदा करने वाले चीन द्वारा अपनाए जाने वाले तरीकों में से एक टेक्नोलॉजी में हेर-फेर करना शामिल है। माइक्रोसाफ्ट, गूगल और एपल जैसी अमेरिकी टेक कंपनियां भी इस बात को लेकर गंभीर हैं कि  AI के इस्तेमाल के लिए उन्हें कौन से गाइडलाइंस का पालन करना होगा।

 

Posted By: Monika Minal

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