रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल पास, लेकिन ट्रंप ने अभी तक नहीं किए हस्ताक्षर; क्या है वजह?
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला एक विधेयक भारी बहुमत से पारित किया ...और पढ़ें

प्रतिनिधि सभा ने रूस प्रतिबंध विधेयक भारी बहुमत से पारित किया
HighLights
प्रतिनिधि सभा ने रूस प्रतिबंध विधेयक भारी बहुमत से पारित किया।
विधेयक राष्ट्रपति को असीमित टैरिफ शक्तियां प्रदान करता है।
सांसदों ने भारत-चीन पर संभावित शुल्क प्रावधानों पर आपत्ति जताई।
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर नकेल कसने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रतिबंध विधेयक को भारी बहुमत से पारित कर दिया है। हालांकि, इस विधेयक का समर्थन करने वाले कई सांसदों ने ही इसके कुछ प्रविधानों पर तीखी आपत्ति भी जताई है। अमेरिकी सांसदों का कहना है कि यह कानून राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को व्यापारिक मामलों में असीमित और बेहद व्यापक शुल्क (टैरिफ) लगाने की खतरनाक शक्तियां प्रदान करता है।
प्रतिनिधि सभा में 159 के मुकाबले 262 वोटों से पारित हुए 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' का मकसद रूसी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और उसकी अर्थव्यवस्था को तोड़ना है। सीनेट से पहले ही मंजूरी पा चुका यह विधेयक अब अंतिम मुहर के लिए राष्ट्रपति ट्रंप के पास जाएगा। लेकिन डेमोक्रेट सांसदों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रमिला जयपाल और इल्हान उमर जैसे सांसदों ने इंटरनेट मीडिया पर स्पष्ट किया कि वे यूक्रेन के साथ खड़े हैं, लेकिन वे ऐसे किसी भी कानून का समर्थन नहीं कर सकते जो राष्ट्रपति को बिना किसी सुरक्षा उपाय के बेलगाम टैरिफ लगाने की ताकत दे।
इस विधेयक के सबसे विवादास्पद हिस्से में राष्ट्रपति को रूसी तेल या गैस के पांच सबसे बड़े आयातकों पर 100 प्रतिशत तक का भारी शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया है। इसमें एक कानूनी रास्ता भी तैयार किया गया है जिसके तहत रूस से ऊर्जा खरीदने की शर्तों के आधार पर भारत और चीन जैसे देशों से आने वाले सामानों पर भी 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। हालांकि, विधेयक अपने आप में भारत पर कोई स्वतः शुल्क नहीं लगाता, लेकिन यह कार्यकारी शाखा को भविष्य में ऐसा करने की असीमित शक्ति जरूर देता है। दूसरी ओर, इस कानून के समर्थकों का दावा है कि इससे पुतिन की युद्ध मशीनरी पंगु बनेगी और वे बातचीत की मेज पर आने को मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप इस विधेयक पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप देते हैं या नहीं।
ANI से मिले इनपुट सोर्स के मुताबिक
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