वाशिंगटन [ जेएनएन ] । उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई शिखर वार्ता को विशेषज्ञों ने 'निक्सन गोज टू चाइना मोमेंट' जैसा बताया है। अमेरिकी विशेषज्ञ इस शिखर वार्ता के नतीजों को लेकर बहुत मायूस हैं। इन विशेषज्ञों का कहना है कि वार्ता प्योंगयांग से अपने परमाणु हथियार नष्ट करने की ठोस प्रतिबद्धता हासिल करने में विफल रही। उधर, अमेरिका राष्‍ट्रपति ने किम से ऐतिहासिक मुलाकात का सफल बताया है। 

ट्रंप ने बताया ऐतिहासिक करार
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इतिहास में एक नए अध्‍याय की शुरुआत हुई है। उन्‍होंने कहा कि किम के साथ एटमी निरस्‍त्रीकरण के लिए समझौता हुआ है। ट्रंप ने कहा कि बातचीत उम्मीद से कहीं बेहतर हुई है। कोई भी जितना उम्मीद कर सकता है उससे बेहतर बातचीत हुई है। उन्‍होंने कहा कि हम दोनों के बीच बेहतर रिश्ते हैं और हम मिलकर बड़ी समस्या का हल करेंगे। हम साथ मिलकर काम करेंगे और हर तरह से उत्तर कोरिया का ध्यान रखेंगे। हमारे रिश्ते शानदार रहेंगे।

शिखर वार्ता से निराश हुए अमेरिकी विशेषज्ञ
विशेषज्ञों ने इस वार्ता को 'निक्सन गोज टू चाइना मोमेंट' की संज्ञा दी है। उनकी राय है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन चीन गए थे और तत्कालीन चेयरमैन माओ से मिले थे, लेकिन उनकी इस यात्रा का कोई ठोस परिणाम नहीं निकला था। इसी दौरे को अमेरिकी मीडिया ने मुहावरा बना दिया। विशेषज्ञों ने कहा है कि सिंगापुर में जिस संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर हुए हैं वह प्योंगयांग के दरकिनार किए जा चुके पुराने वादों का मिश्रण दिखता है। इससे यही पता चलता है कि दुनिया के मंच पर या घर में ट्रंप का फायदा अगले स्तर के समझौते पर निर्भर करेगा।

ट्रंप के स्वच्छंद कूटनीतिक स्टाइल पर खुश होने वाले समर्थक शिखर वार्ता की सराहना विदेश नीति के विजय के रूप में कर सकते हैं। वे लोग इसे अमेरिका के लंबे समय के घोर शत्रु पर राष्ट्रपति की विजय मान सकते हैं। लेकिन शिखर वार्ता प्योंगयांग की लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम परमाणु मिसाइलों से सुरक्षा दिलाने में असमर्थ साबित हुई है।

बता दें कि ट्रंप और जोंग उन के बीच सिंगापुर में जारी ऐतिहासिक शिखर वार्ता का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाना और कोरियाई प्रायद्वीप में पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण का था। दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात सिंगापुर के लोकप्रिय पर्यटन स्थल सेंटोसा के एक होटल में हुई। इस मुलाकात को लेकर देश दुनिया की नजर इस पर टिकी थी।

वार्ता की पूर्व संध्या पर अमेरिका ने ‘पूर्ण, सत्यापित और अपरिवर्तनीय’ परमाणु निरस्त्रीकरण के बदले उत्तर कोरिया को ‘विशिष्ट’ सुरक्षा गारंटी की पेशकश की थी। अमेरिका ने शिखर वार्ता पर अपना पक्ष रखते हुए इस बात पर जोर दिया था कि उसे कोरियाई प्रायद्वीप में पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। ट्रंप ने कहा था कि किम के पास इतिहास रचने का एक मौका है।

Posted By: Ramesh Mishra