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भारत में बनी HIV रोकथाम की जेनेरिक दवा को अमेरिकी मंजूरी, सालभर के डोज की कीमत करीब 40 डॉलर रहने की उम्मीद

Published: Mon, 02 Nov 2026 11:46 PM (IST)

अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने भारत में बनी एचआईवी संक्रमण रोकने वाली जेनेरिक दवा लेनाकापाविर को मंजूरी दे दी है।

भारत में बनी HIV रोकथाम की जेनेरिक दवा को अमेरिकी मंजूरी।

भारत में बनी HIV रोकथाम की जेनेरिक दवा को अमेरिकी मंजूरी।

HighLights

  1. भारत में बनी एचआईवी दवा लेनाकापाविर को FDA मंजूरी।

  2. यह जेनेरिक दवा साल में दो बार इंजेक्शन से।

  3. वार्षिक खुराक की अनुमानित कीमत मात्र 40 डॉलर।

डिजिटल डेस्क, लुइविल। एचआईवी संक्रमण की रोकथाम के लिए भारत में बनी जेनेरिक दवा को अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने मंजूरी दे दी है। लेनाकापाविर नाम की यह दवा साल में केवल दो बार इंजेक्शन के रूप में दी जाती है। इससे उन देशों में एचआईवी संक्रमण रोकने की कोशिशों को मजबूती मिलने की उम्मीद है, जहां महंगी दवाओं और नियमित इलाज तक पहुंच बड़ी चुनौती है। इस दवा की सालभर की खुराक की कीमत करीब 40 डॉलर रहने का अनुमान है।

भारत की डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज ने यूनिटएड, क्लिंटन हेल्थ एक्सेस इनिशिएटिव और विट्स आरएचआइ के सहयोग से इसका जेनेरिक संस्करण विकसित किया है। इसे 120 निम्न और मध्यम आय वाले देशों में सस्ती दर पर उपलब्ध कराने की योजना है। एफडीए की मंजूरी से इन देशों में दवा की नियामकीय मंजूरी की प्रक्रिया भी तेज हो सकती है।

संक्रमण रोकने में असरदार

लेनाकापाविर एचआईवी से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाली प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (प्रेप) दवा है। इसे संक्रमण के जोखिम वाले लोग एचआईवी के संपर्क में आने से पहले बचाव के लिए लेते हैं। अधिक जोखिम वाले लोगों पर किए गए दो प्रमुख अध्ययनों में इस इंजेक्शन से नए संक्रमण लगभग खत्म होने जैसे नतीजे सामने आए थे। साल में केवल दो बार खुराक लेने की सुविधा से रोजाना गोली लेने में होने वाली परेशानी भी कम हो सकती है।

यूनिटएड की एचआईवी अनुदान कार्यक्रम प्रमुख कारमेन पेरेज कासास के मुताबिक, नियमित रूप से रोजाना दवा लेना कई लोगों के लिए मुश्किल होता है। ऐसे में लंबे अंतराल पर दिया जाने वाला इंजेक्शन संक्रमण से बचाव के प्रयासों को बेहतर बना सकता है।

मूल दवा अब भी महंगी

लेनाकापाविर की मूल दवा येजटुगो को पिछले साल अमेरिका में मंजूरी मिली थी। इसे गिलियड साइंसेज ने विकसित किया है। अमेरिका में इसकी सूची कीमत सालाना 28,218 डॉलर है। पेटेंट सुरक्षा के कारण भारत में बने जेनेरिक संस्करण को अमेरिकी बाजार में बेचा नहीं जा सकता।

एफडीए ने इसे दूसरे देशों में अमेरिकी सरकार के एचआईवी कार्यक्रमों के तहत इस्तेमाल के लिए अस्थायी मंजूरी दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2025 में दुनिया भर में करीब 4.1 करोड़ लोग एचआईवी के साथ जी रहे थे और इससे जुड़े कारणों से लगभग 5.7 लाख लोगों की मौत हुई।

(समाचार एजेंसी एपी के इनपुट के साथ)

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