दक्षिण एशियाई देशों को कर्ज के जाल में फंसा रहा चीन, अमेरिका ने जताई चिंता
अमेरिका ने दक्षिण एशिया में चीन की कर्ज जाल नीति पर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन रणनीतिक रूप ...और पढ़ें

दक्षिण एशियाई देशों को कर्ज के जाल में फंसा रहा चीन। (फाइल)
HighLights
अमेरिका ने चीन की कर्ज जाल नीति पर चिंता जताई।
चीन रणनीतिक रूप से देशों को कर्ज देकर प्रभाव बढ़ा रहा।
पाकिस्तान, श्रीलंका पर चीन का भारी कर्ज, रिपोर्ट में खुलासा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दक्षिण एशिया में भारत के पड़ोसी देशों को कर्ज के जाल में फंसाने की चीन की नीति पर अमेरिका ने चिंता जताई है। कहा है कि चीन क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए ऐसा कर रहा है। चीन यह कर्ज देशों के विकास के लिए नहीं दे रहा है बल्कि उन्हें जाल में फंसाने की रणनीति के तहत दे रहा है जिससे कि कुछ वर्ष बाद कर्जदार देश चीन के इशारे पर उसकी मर्जी वाले निर्णय ले सकें।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान पर इस समय चीन का 77 अरब डॉलर का कर्ज है जबकि श्रीलंका पर 11 अरब डॉलर का कर्ज है। अमेरिका के एक्सपोर्ट-इंपोर्ट (एक्जिम) बैंक ने संसदीय समिति को विश्व की आर्थिक स्थिति के बारे दी जानकारी में बताया है कि चीन कर्ज को रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
उसने इसी नीति पर चलते हुए विश्व के करीब 150 देशों को फंसाने वाली शर्तों पर कर्ज दे रखे हैं। इनके जरिये चीन उन देशों के प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा कर रहा है, साथ ही उनकी रणनीतिक स्थिति का लाभ भी उठा रहा है।
चीन विश्व में सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट क्रेडिट देने वाला देश
संसदीय समिति के चेयरमैन वारेन डेविडसन ने कहा, चीन की तरफ से पैदा हुआ खतरा अब बढ़ता जा रहा है। चीन विश्व में सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट क्रेडिट देने वाला देश बन गया है। वह देशों को मध्यम और लंबे समय तक व्यापार के लिए धन मुहैया कराने के लिए कर्ज और गारंटी दे रहा है। केवल 2024 में ही उसने विभिन्न देशों को 23 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट क्रेडिट दिया। ऐसा कर वह अमेरिका से आगे निकल गया है।
एक्जिम बैंक के चेयरमैन जोवन जोवानोविक ने सांसदों को बताया कि अमेरिकी कंपनियों को अब विश्व बाजार में सरकारी समर्थन और करों की छूट पाने वाली विदेशी कंपनियों से कड़ा मुकाबला झेलना पड़ रहा है। रणनीतिक महत्व वाले उद्योगों से जुड़ी अमेरिकी कंपनियों को मुकाबले में बने रहने में और ज्यादा मुश्किल हो रही है।
इसलिए अमेरिकी सरकार को चाहिए कि वह स्वदेशी कंपनियों के निर्यात को प्रोत्साहन देने वाली नीतियां बनाए जिससे विश्व बाजार में अमेरिकी कंपनियां मुकाबले में बनी रह सकें।
(समाचार एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ)
