संयुक्त राष्ट्र, प्रेट्र। कोरोना महामारी के बीच संयुक्त राष्ट्र महासभा का ऐतिहासिक 75वां सत्र बुधवार से शुरू हो गया है। सबसे पहले तुर्की के राजनयिक वोल्कन बोजकिर ने सत्र के अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया। उन्होंने नाइजीरिया के तिजानी मुहम्मद बंदे का स्थान लिया है।

विश्व संगठन के 75 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार है जब विभिन्न देशों के नेता वर्चुअल तरीके से एक-दूसरे से रूबरू होंगे। कोरोना महामारी के चलते जहां पूरे विश्व में लगभग तीन करोड़ लोग बीमार हैं वहीं अब तक नौ लाख इकत्तीस हजार लोगों की मौत हो चुकी है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतेरस ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा, 'विश्व निकाय के इतिहास में यह वर्ष महत्वपूर्ण है, क्योंकि सभी देश कोरोना महामारी से जूझ रहे हैं। पिछले सात महीने हम से कई लोगों के लिए व्यक्तिगत और व्यवसायिक तौर पर बेहद कठिन रहे हैं। हम सभी अनिश्चितता से जूझ रहे हैं और आगे की स्थिति भी बहुत साफ नहीं है।' महासभा की उच्चस्तरीय बैठक 21 सितंबर को होगी।

सत्र की जनरल डिबेट का कार्यक्रम 22 सितंबर से शुरू होगा 29 सितंबर तक चलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 सितंबर को एक पूर्व में रिकॉर्ड किए गए बयान के माध्यम से सत्र को संबोधित करेंगे। अबकी बार सबसे पहले ब्राजील के राष्ट्रपति जेर बोल्सोनारो को जनरल डिबेट में सबसे पहले बोलने का मौका मिलेगा। पारंपरिक तौर पर जनरल डिबेट में अमेरिका दूसरे नंबर का वक्ता होता है और माना जाता है कि ट्रंप इसके लिए न्यूयॉर्क जा सकते हैं।

बहुपक्षवाद सभी समस्याओं की रामबाण दवा

महासभा के अध्यक्ष के तौर पर पदभार ग्रहण करने वाले तुर्की के राजनयिक वोल्कन बोजकिर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर शारीरिक दूरी से किसी प्रकार की मदद नहीं मिलेगी क्योंकि कोई भी देश अकेले इस महामारी से नहीं लड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि बहुपक्षवाद दुनिया की सभी समस्याओं के लिए रामबाण दवा है। संयुक्त राष्ट्र के राजदूतों और राजनयिकों को संबोधित करते हुए बोजकिर ने कहा कि महामारी की शुरुआत के बाद से बहुपक्षवाद के आलोचक और मुखर हो गए हैं और इसका इस्तेमाल एकतरफा कदमों को सही ठहराने के लिए करने लगे हैं।

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