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'ईरान 20 साल के लिए परमाणु कार्यक्रम छोड़े तो समझौता संभव', ट्रंप बोले- तेहरान जल्द करे बातचीत

Published: Sat, 16 May 2026 02:15 AM (IST)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि चीन और अमेरिका ईरान युद्ध को खत्म करने के मुद्दे पर ...और पढ़ें

'ईरान 20 साल के लिए परमाणु कार्यक्रम छोड़े तो समझौता संभव', ट्रंप (फोटो- रॉयटर)

'ईरान 20 साल के लिए परमाणु कार्यक्रम छोड़े तो समझौता संभव', ट्रंप (फोटो- रॉयटर)

HighLights

  1. चीन से लौटते समय बोले ट्रंप- ईरान को देनी होगी वास्तविक गारंटी

  2. चिनफिंग की खरी-खरी, ईरान युद्ध को लंबा खींचने का कोई औचित्य नहीं

  3. ईरान मुद्दे पर अमेरिका-चीन एकमत, तेहरान जल्द समझौता करे

  4. चीनी तेल कंपनियों पर लगे प्रतिबंध हटाने पर जल्द फैसला संभव

जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि चीन और अमेरिका ईरान युद्ध को खत्म करने के मुद्दे पर एकमत हैं और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भी माना है कि तेहरान को जल्द समझौता करना चाहिए।

ट्रंप ने कहा कि उनकी ईरान को लेकर “धैर्य की सीमा'' खत्म होती जा रही है और यदि समझौता नहीं हुआ तो हालात फिर बिगड़ सकते हैं।

उन्होंने कहा कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को 20 वर्षों के लिए निलंबित करने के प्रस्ताव से सहमत हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए तेहरान की ओर से वास्तविक और भरोसेमंद प्रतिबद्धता जरूरी होगी।

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, बीजिंग दौरे से लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “20 साल काफी हैं, लेकिन इसकी गारंटी वास्तविक होनी चाहिए।''

ट्रंप ने आगे कहा कि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खोलना होगा। ट्रंप ने दावा किया कि शी चिन¨फग ने यह भरोसा भी दिया है कि चीन ईरान को सैन्य उपकरण नहीं भेजेगा।

उन्होंने इसे बहुत बड़ा बयान बताया। बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर परमाणु कार्यक्रम अहम रोड़ा बना हुआ है। ट्रंप दबाव बना रहे हैं कि ईरान हमेशा के लिए परमाणु कार्यक्रम छोड़े, जबकि ईरान का कहना है कि वह अधिकतम एक दशक तक इससे दूर रह सकता है।

ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि ईरानी तेल खरीदने के कारण चीनी कंपनियों पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने पर अगले कुछ दिनों में फैसला लिया जा सकता है। हाल ही में अमेरिका ने कई चीनी रिफाइनरियों पर प्रतिबंध लगाए थे।

ईरान युद्ध को लेकर भी ट्रंप को काफी खरी-खरी सुननी पड़ी। चीन के विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि यह युद्ध कभी शुरू ही नहीं होना चाहिए था और अब इसे जारी रखने का कोई कारण नहीं है।

परमाणु बम बनाने के पक्ष में कभी नहीं थे : ईरान

रॉयटर के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान को अमेरिका की ओर से बातचीत जारी रखने के संकेत मिले हैं। उन्होंने कहा कि भारत और चीन की किसी भी सकारात्मक भूमिका का स्वागत है।

उन्होंने दोहराया कि ईरान कभी भी परमाणु बम बनाने के पक्ष में नहीं था। साथ ही कहा कि जिन देशों का युद्ध से सीधा संबंध नहीं है, उनके जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने दिया जाएगा।

ट्रंप ने माना, अमेरिका की साख घटी

एपी के अनुसार, ट्रंप का चीन दौरा गर्मजोशी और कूटनीतिक शिष्टाचार से भरपूर जरूर रहा, लेकिन ठोस नतीजों के लिहाज से यह काफी फीका साबित हुआ।

व्यापारिक समझौतों से लेकर ईरान युद्ध तक, ट्रंप को चीन से वैसी मदद या समर्थन नहीं मिला जिसकी उन्हें उम्मीद थी। शी ने ताइवान मुद्दे पर भी अमेरिका को कड़ा संदेश दिया और कहा कि इस मामले में गलत कदम टकराव बढ़ा सकता है।

व्यापारिक मोर्चे पर भी तस्वीर उत्साहजनक नहीं रही। ट्रंप ने दावा किया कि चीन 200 बोइंग विमान खरीदेगा, लेकिन बाजार को यह सौदा उम्मीद से काफी छोटा लगा और बोइंग के शेयर गिर गए।

दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति, एआई चिप्स के निर्यात और टैरिफ विवाद जैसे अहम मुद्दों पर भी कोई निर्णायक प्रगति नहीं हुई। ट्रंप ने यह भी माना कि अमेरिका की वैश्विक साख कमजोर हुई है, हालांकि उन्होंने इसके लिए पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन को जिम्मेदार ठहराया।

ईरान युद्धविराम पाकिस्तान पर एहसान : ट्रंप

प्रेट्र के अनुसार, ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्धविराम पाकिस्तान के अनुरोध पर कराया था। उन्होंने कहा कि यह कदम पाकिस्तान के लिए “एक एहसान'' के तौर पर उठाया गया।

पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “हमने युद्धविराम एक दूसरे देश के अनुरोध पर किया। इससे मुझे व्यक्तिगत रूप से काफी फायदा हो सकता था, लेकिन हमने यह पाकिस्तान के लिए एक एहसान के तौर पर किया।'' हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि पाकिस्तान ने किस स्तर पर मध्यस्थता की थी।