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'हमला करें या नहीं', ईरान के खिलाफ युद्ध को लेकर दुविधा में क्यों फंसे ट्रंप और नेतन्याहू?

Published: Wed, 14 Oct 2026 12:58 PM (IST)

अमेरिका और इजरायल के चुनावों से पहले नेतन्याहू और ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान पर विचार कर रहे हैं, लेकिन ट्रंप फिलहाल हिचकिचा रहे हैं।

ईरान पर युद्ध को लेकर दुविधा में फंसे ट्रंप-नेतन्याहू

ईरान पर युद्ध को लेकर दुविधा में फंसे ट्रंप-नेतन्याहू

HighLights

  1. नेतन्याहू ने ट्रंप को ईरान पर हमले को उकसाया।

  2. ट्रंप चुनावों के कारण सैन्य कार्रवाई से हिचकिचा रहे।

  3. अमेरिका-इजरायल सेनाएं संभावित युद्ध के लिए अलर्ट।

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिका और इजरायल में होने वाले चुनावों से ठीक पहले मध्य पूर्व में एक नए और बड़े युद्ध की आहट तेज हो गई है।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ एक नया व्यापक सैन्य अभियान शुरू करने की संभवानओं पर विचार कर रहे हैं।

एक्सियोस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले हफ्ते US लीडर के साथ कॉल के दौरान, नेतन्याहू ने तेहरान के कथित न्यूक्लियर हथियारों की खोज के बारे में एक और परेशान करने वाली इजरायली इंटेलिजेंस रिपोर्ट को फ्लैग किया है ताकि ट्रंप को तेहरान पर बमबारी शुरू करने के लिए मनाया जा सके।

'पिकैक्स माउंटेन' और परमाणु कार्यक्रम का डर

नेतन्याहू ने पिछले हफ्ते ट्रंप के साथ हुई एक कॉल के दौरान इजरायली खुफिया एजेंसी की एक चिंताजनक रिपोर्ट दी। इजरायली पीएम ने दावा किया है कि उन्हें चिंता है कि ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को फिर से बनाने के लिए परेशान करने वाले कदम उठा रहा है।

सूत्रों ने कहा कि इजरायल खास तौर पर इस बात से चिंतित है कि ईरान पिकैक्स माउंटेन को यूरेनियम एनरिचमेंट साइट के तौर पर ऑपरेट कर सकता है।

नेतन्याहू ने उन कदमों के बारे में चिंता जताई जिनमें दावा किया गया है कि ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम के सभी अलग-अलग हिस्सों को फिर से बनाने के लिए उठा रहा है।

पेंटागन तैयार, लेकिन ट्रंप की टीम में हिचकिचाहट

रिपोर्ट के मुताबिक US डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ और US सेंट्रल कमांड के लीडरशिप ने भी इजरायली आइडिया का सपोर्ट किया है, लेकिन ट्रंप के ज्यादातर एडवाइजर अभी के लिए इकोनॉमिक बैन और दूसरे तरह के प्रेशर बनाए रखने के पक्ष में हैं।

रिपोर्ट से मिली जानकारी के मुताबिक शुरुआत में ट्रंप भी छोटे और सटीक हमलों की ओर झुकते दिख रहे थे, लेकिन अपनी कोर टीम से सलाह-मशविरा करने के बाद उन्होंने अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। ट्रंप ने बाद में मीडिया को स्पष्ट किया कि वे मिडटर्म चुनावों से पहले ईरान पर कोई हमला नहीं करेंगे।

युद्ध से किसे होगा फायदा

ईरान में नया और बड़ा युद्ध शुरू होने का असर अमेरिका और इजरायल दोनों देशों की घरेलू राजनीति पर पड़ेगा।

27 अक्टूबर को होने वाले इजरायली चुनावों से ठीक पहले युद्ध छिड़ने से नेतन्याहू के पक्ष में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर के अनुसार, इस समय युद्ध शुरू होने से ईरान के संभावित जवाबी हमलों के कारण इजरायली चुनाव टल भी सकते हैं।

वहीं अगर ईरान में नया युद्ध शुरू होता है तो 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदों को करारा झटका लग सकता है। अमेरिकी मतदाता एक नए और अलोकप्रिय युद्ध से बचना चाहते हैं, साथ ही इससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतें आसमान छू सकती हैं।

दोनों देश की मिलिट्री अलर्ट पर

अमेरिका और इजरायल के सूत्रों ने एक्सियोस को बताया कि दोनों नेताओं के बीच असहमति के बावजूद, US और इजरायल दोनों की मिलिट्री अलर्ट पर हैं और ट्रंप के मन बदलने की स्थिति में तैयार रहने के लिए तैयारी पूरी कर रही हैं।

एक अमेरिकी अधिकारी ने इस स्थिति पर कहा, 'बीबी (नेतन्याहू) दोबारा ईरान में घुसना चाहते हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से इस बारे में बात भी की है और राष्ट्रपति ने कहा ठीक है बीबी, आगे बढ़ो और तैयार रहो। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई अंतिम प्रतिबद्धता है। तैयार रहने का मतलब अभी भी हो सकता है, बाद में भी, या शायद कभी नहीं।'

व्हाइट हाउस ने दावे खारिज किए

दूसरी ओर, व्हाइट हाउस ने इन सभी मीडिया रिपोर्ट्स और दावों को खारिज करते हुए इन्हें गलत करार दिया है। व्हाइट हाउस अधिकारी ने फिर से स्पष्ट करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि चुनावों से पहले किसी भी समय ईरान पर हमला करने का कोई विचार नहीं है।

कथित तौर पर उस व्यक्ति ने कहा, 'प्रेसिडेंट ने कहा है कि हम मिडटर्म चुनावों से पहले ईरान पर हमला नहीं करेंगे'

इस बीच नेतन्याहू के ऑफिस ने टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि पीएम नेतन्याहू, राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिकी प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में रहते हैं, लेकिन बातचीत को लेकर वह सार्वजनिक बयान नहीं देते हैं।

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