'हार मान लो, वरना सब कुछ तबाह समझो', 48 घंटे की डेडलाइन नजदीक; ट्रंप ने ईरान को दी अब ये धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए मंगलवार तक की समय सीमा दी है। ...और पढ़ें

ट्रंप की ईरान को नई धमकी। (रॉयटर्स)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ जारी युद्ध में अस्थायी संघर्ष विराम को मानने से इनकार कर दिया है। दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ईरान के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए मंगलवार आखिरी डेडलाइन है।
ईरान पर हमला बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि अगर मेरी मर्जी चलती, तो मैं तेल ले लेता। उन्होंने कहा कि यह युद्ध बहुत जल्दी खत्म हो सकता है, अगर वे (ईरान) वह करे जो उन्हें करना है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें कुछ चीजें करनी होंगी, वे यह जानते हैं। वहां के लोग अब उन पागलों की तुलना में कहीं ज्यादा समझदार हैं, जो पहले और दूसरे चरण में थे।
हार मान लो वरना न पुल बचेंगे, न बिजली- ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को धमकी भरे अंदाज में कहा, "ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते, वे बस हार मानना चाहते हैं। वे रोना चाहता हैं। जैसे कि कहावत है, 'हार मानना', उन्हें मानना ही होगा। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनके पास न कोई पुल बचेंगे, न कोई पावर प्लांट बचेंगे। उनके पास कुछ भी नहीं बचेगा।"
ईरान ने खारिज किया संघर्ष विराम का प्रस्ताव
ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे युद्ध में अस्थायी युद्ध विराम को खारिज कर दिया है। ईरान ने सोमवार को मध्यस्थों के जरिए हालिया संघर्ष विराम के प्रस्तावों के जवाब में अपनी स्थिति और मांगे तय कर ली हैं। ये टिप्पणियां लड़ाई रोकने के लिए नए सिरे से हो रही कूटनीतिक प्रयासों की खबरों के बीच आई हैं।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि तेहरान ने मध्यस्थ चैनलों के जरिए अपनी जरूरतें पहले ही बता दी थीं और यह साफ कर दिया था कि अमेरिका के पहले प्रस्तावों को खारिज कर दिया गया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, बगाई ने कहा कि अमेरिका की पहले की मांगे, जिनमें पाकिस्तान के जरिए भेजा गया 15-सूत्रीय प्रस्ताव भी शामिल था, अस्वीकार्य है।
अमेरिका का प्रस्ताव बेहद असामान्य और अतार्किक- बगाई
बगाई ने कहा कि यह प्रस्ताव बेहद असामान्य और अतार्किक था। ईरान का अमेरिका के साथ बातचीत का अनुभव बहुत कड़वा रहा है। ईरान अपनी उन मांगों को साफ तौर पर रखने में हिचकिचाता नहीं है, जिन्हें वह जायद मानता है। ऐसा करने को समझौते के संकेत के तौर पर नहीं बल्कि अपनी स्थिति का बचाव करने में उसके आत्मविश्वास के प्रतिबिंब के तौर पर देखा जाना चाहिए।
