जो पहले से ही बंद है, उसे ब्लॉक क्यों? होर्मुज को लेकर ट्रंप के फैसले पर उठे सवाल
डोनल्ड ट्रंप के होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक करने के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं। ट्रंप का यह कदम ईरान ...और पढ़ें
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ट्रंप के फैसले पर उठे सवाल (फोटो-रॉयटर्स)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर डोनल्ड ट्रंप के ब्लॉकेड फैसले ने वैश्विक स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञ और विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं कि जब यह अहम समुद्री मार्ग पहले से ही तनाव और सीमित गतिविधियों के कारण लगभग ठप है, तो इसे औपचारिक रूप से ब्लॉक करने की जरूरत क्यों पड़ी?
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सख्त नियंत्रण और निगरानी बढ़ा दी है। इसे ब्लॉकेड के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि हकीकत में यहां पहले से ही जहाजों की आवाजाही काफी कम हो चुकी है। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव ने इस मार्ग को पहले ही संवेदनशील बना दिया था।
पहले से बंद जैसी स्थिति क्यों?
होर्मुज स्ट्रेट में लगातार सैन्य तनाव और खतरे के कारण कई शिपिंग कंपनियां इस रास्ते से बच रही हैं, क्योंकि बीमा (इंश्योरेंस) लागत बहुत बढ़ गई है। संभावित हमलों के डर से जहाजों की संख्या में भारी कमी आई है। यानी तकनीकी रूप से मार्ग खुला है, लेकिन व्यवहारिक रूप से इसकी उपयोगिता पहले ही सीमित हो चुकी है।
ट्रंप का मकसद क्या हो सकता है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप का यह कदम सिर्फ रणनीतिक नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी हो सकता है।
- ईरान पर दबाव बढ़ाना
- वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर नियंत्रण दिखाना
- घरेलू राजनीति में सख्त नेता की छवि मजबूत करना
होर्मुज के बंद होने से वैश्विक असर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल व्यापार का प्रमुख केंद्र है। यहां किसी भी तरह की बाधा से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके साथ ही वैश्विक सप्लाई भी चेन प्रभावित हो सकती है। एशियाई देशों, खासकर भारत और चीन पर ज्यादा असर पड़ सकता है।
