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पहले शांति का दूत, अब खुद को भगवान बता रहे ट्रंप... विवाद के बाद डिलीट की ईसा मसीह वाली AI तस्वीर

Published: Tue, 14 Apr 2026 08:26 AM (IST)

ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर खुद को ईसा मसीह के रूप में दर्शाती AI तस्वीर साझा की, जिसे विवाद के ...और पढ़ें

HighLights

  1. ट्रंप ने AI से खुद को ईसा मसीह दर्शाती तस्वीर साझा की।

  2. विवाद बढ़ने पर ट्रंप ने तस्वीर हटाई, डॉक्टर बताया खुद को।

  3. ट्रंप और पोप लियो 14वें के बीच तीखा विवाद गहराया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया साइट ट्रूथ सोशल पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार एक तस्वीर साझा की, जिसमें उन्हें ईसा मसीह की तरह चमत्कार करते हुए दिखाया गया है।

इस तस्वीर में वह एक बीमार व्यक्ति को स्पर्श करते नजर आते हैं, जो बाइबिल में वर्णित लाजर को जीवित करने की घटना से प्रेरित बताई जा रही है। तस्वीर में अमेरिकी झंडा, सैन्य विमान और स्वर्गदूत जैसे प्रतीक भी शामिल हैं, जिससे यह विवाद और गहरा गया है।

हालांकि, तमाम आलोचनाओं के बाद उन्होंने ये तस्वीर डिलीट कर दी। ट्रंप ने बाद में सफाई भी दी कि उन्होंने खुद को एक डॉक्टर के तौर पर पेश किया था, न कि ईसा मसीह जैसा।

पोप लियो से भी विवाद

उधर ट्रंप और पोप लियो 14वें के बीच विवाद गहरा गया है और बयानबाजी तेज हो गई है। ट्रंप ने पोप पर तीखा हमला करते हुए उन्हें अपराध पर कमजोर और विदेश नीति के मामले में बेहद खराब बताया है।

उन्होंने कहा कि मैं व्हाइट हाउस में हूं, इसलिए लियो वेटिकन में पोप हैं। यह प्रतिक्रिया पोप द्वारा अमेरिका की विदेश नीति, विशेषकर ईरान और पश्चिम एशिया के सैन्य संघर्षों पर शांति व संवाद की अपील के बाद आई है।

वहीं, पोप ने भी अपने जवाब में कहा है कि उनको ट्रंप प्रशासन का डर नहीं है और युद्ध के खिलाफ वह बोलते रहेंगे। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी ने पोप की आलोचना करने पर ट्रंप की कड़ी निंदा की है। पेजेशकियान ने एक्स पर लिखा कि महामहिम पोप लियो, मैं ईरान की ओर से आपके अपमान की निंदा करता हूं। ईसा मसीह का अपमान पूरी तरह अस्वीकार्य है।

मेलोनी ने भी की आलोचना

इटली की प्रधानमंत्री जार्जिया मेलोनी ने भी ट्रंप की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि पोप के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। बता दें कि अमेरिकी मूल के पहले पोप लियो हाल के हफ्तों में अमेरिका के सैन्य हस्तक्षेपों पर चिंता जता चुके हैं। ईरान, लेबनान और क्षेत्रीय संघर्षों पर उन्होंने बार-बार युद्धविराम और कूटनीतिक समाधान की वकालत की।

पिछले सप्ताह उन्होंने कहा था कि सर्वशक्तिमान होने का भ्रम ईरान में अमेरिका-इजरायल युद्ध को हवा दे रहा है। लेबनान में इजरायली सैन्य गतिविधियों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने नागरिकों की सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़ी नैतिक जिम्मेदारी बताया और सभी पक्षों से तत्काल संघर्षविराम की अपील की।

पोस्ट लिखकर ट्रंप ने बोला था हमला

रॉयटर्स के अनुसार, ट्रंप ने अपने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लंबी पोस्ट में दावा किया कि यदि वह राष्ट्रपति न होते तो लियो पोप नहीं बनते। उन्होंने लिखा कि चर्च ने उन्हें अमेरिकी होने के कारण चुना ताकि ट्रंप प्रशासन से निपटना आसान हो सके। राष्ट्रपति ने पोप पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों को लेकर नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, “मैं ऐसा पोप नहीं चाहता जो ईरान के परमाणु हथियार को स्वीकार्य माने या अमेरिका की कार्रवाई की आलोचना करे, जबकि मैं वही कर रहा हूं जिसके लिए भारी बहुमत से चुना गया हूं।''ट्रंप ने कोविड काल में गिरिजाघरों पर लगे प्रतिबंधों का मुद्दा उठाते हुए भी पोप की आलोचना की और उन पर कट्टर वामपंथ के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया।

उन्होंने पोप को राजनीति से दूर रहने और एक अच्छे धार्मिक नेता की भूमिका निभाने की सलाह दी। बाद में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि पोप अच्छा काम कर रहे हैं मैं उनका प्रशंसक नहीं हूं।'

पोप ने कहा, युद्ध के खिलाफ बोलते रहेंगे

एपी के अनुसार, पोप लियो ने स्पष्ट किया कि वे किसी राजनीतिक टकराव में नहीं पड़ना चाहते और युद्ध के खिलाफ अपनी आवाज जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, “मैं ट्रंप के साथ बहस में नहीं पड़ना चाहता। मैं राजनेता नहीं हूं और न ही राजनीति में उतरने का इरादा रखता हूं।''

उन्होंने जोर देकर कहा कि सुसमाचार (गोस्पेल) का संदेश शांति, करुणा और संवाद का है, जिसे कुछ लोग गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं।पोप ने कहा, “मैं युद्ध के खिलाफ खुलकर बोलता रहूंगा, ताकि शांति, संवाद और देशों के बीच बहुपक्षीय रिश्तों को बढ़ावा दिया जा सके और समस्याओं का न्यायसंगत समाधान खोजा जा सके।''

उन्होंने यह भी कहा कि वे ट्रंप प्रशासन से नहीं डरते और लोगों को स्वयं निष्कर्ष निकालने चाहिए। मानवीय संकट पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा, “दुनिया में बहुत अधिक पीड़ा है, बहुत से निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं। किसी को खड़े होकर यह कहना होगा कि एक बेहतर रास्ता भी है।'' उन्होंने दोहराया कि चर्च का संदेश पूरी तरह धार्मिक है—धन्य हैं वे जो शांति स्थापित करते हैं।

ट्रंप की चहुंओर आलोचना

ट्रंप के बयानों की व्यापक आलोचना भी हो रही है। आईएएनएस के अनुसार, भारत में फलस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला अबु शावेश ने कहा कि पोप की आलोचना से बहुपक्षवाद, अंतरराष्ट्रीय नियम और कानून कमजोर होते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान के खिलाफ युद्ध से न केवल फलस्तीन बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय को नुकसान पहुंचा है। घाना स्थित ईरानी दूतावास ने भी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप पर गंभीर आपराधिक आरोपों का उल्लेख किया और कहा कि उनकी मिसाइल हमले में मीनाब के 168 स्कूली बच्चों की जान गई। नर्क में आपका इंतजार हो रहा है।

यूएस कान्फ्रेंस ऑफ कैथोलिक बिशप्स ने भी ट्रंप के बयान को अनुचित और विभाजनकारी बताया। संस्था के आर्कबिशप पाल एस. कोकले ने कहा कि पोप को निशाना बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है और वे ट्रंप के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं।

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