वेलिंगटन, एएनआइ। यदि आपको घूमने-फिरने (ट्रैवलिंग) करने का शौक है तो आपके लिए अच्छी खबर है। एक शोध के मुताबिक, घूमने-फिरने से ना सिर्फ आपके दिमाग पर बल्कि आपके स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ता है, खासतौर पर डिमेंशिया और अवसाद से पीडि़त लोगों के लिए यह लाभदायक है। एडिन कोवान यूनिवर्सिटी के एक नए क्रास डिसिप्लिनरी पेपर में यह प्रस्ताव रखा गया है कि पर्यटन को देखने के नजरिए को बदलना चाहिए।

डिमेंशिया से लड़ने में मददगार

इसे ना सिर्फ इसे एक मनोरंजक अनुभव के रूप में बल्कि एक ऐसे उद्योग के रूप में देखें जो वास्तविक स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकता है। इस अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता डाक्टर जून वेन ने कहा कि पर्यटन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और विपणन विशेषज्ञों की विविध टीम ने जांच की है कि पर्यटन के जरिए डिमेंशिया से पीडि़त लोगों को कैसे लाभ पहुंचाया जा सकता है।

ट्रैवलिंग के लाभ 

डाक्टर वेन ने कहा कि डिमेंशिया के उपचार की सिफारिश के तौर पर चिकित्सक विशेषज्ञ संगीत, व्यायाम, संज्ञानात्मक उत्तेजना, स्मरण चिकित्सा, संवेदी उत्तेजना और रोगी के भोजन के समय और पर्यावरण के अनुकूलन जैसे मनोभ्रंश उपचार की सिफारिश कर सकते हैं। ये सब चीजें तब भी मौजूद होती हैं, जब आप छुट्टियों पर होते हैं। यह शोध अवधारणात्मक रूप से चर्चा करने वाले पहले लोगों में से एक है कि ये पर्यटन अनुभव संभावित रूप से डिमेंशिया पीडि़तों के किस तरह से काम आ सकते हैं।

छुट्टियां मस्ती या इलाज?

डाक्टर वेन ने कहा की कई तरह के टूरिज्म का मतलब है कि डिमेंसिया जैसी कई बीमारियों का इससे इलाज होने की संभावना है। उदाहरण के तौर पर, नया वातावरण और नया अनुभव, संज्ञानात्मक और संवेदी उत्तेजना प्रदान कर सकता है। जिस तरह से लगातार व्यायाम करने से आप मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं, उसी तरह से घूमने-फिरने से आप फिजिकल रूप से सक्रिय होते हैं और यह सामान्य रूप से टहलने से कही ज्यादा बेहतर होता है।

शरीर रहता है चुस्‍त दुरुस्‍त 

शोधकर्ताओं ने कहा कि जब आप कहीं घूमने-फिरने जाते हैं तो उस दौरान आपके खाना भी अलग तरह का होता है। आप आम तौर पर कई लोगों के साथ अधिक सामाजिक हो जाते हैं और और पारिवारिक शैली के भोजन को डिमेंशिया रोगियों के खाने के व्यवहार को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने वाला पाया गया है। इसके अलावा, शुद्ध हवा और सूर्य की रोशनी अपने अंदर विटामिन डी और सेरोटोनिन का स्तर बढ़ा देते हैं। शोधकर्ताओं ने कहा,

डिमेंशिया के रोगियों को पर्यटन से लाभ

ये सब कुछ जो एक समग्र पर्यटन अनुभव का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक साथ आता है और यह देखना आसान बनाता है कि डिमेंशिया के रोगियों को पर्यटन से कैसे लाभ हो सकता है। डाक्टर वेन ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के कारण हाल के सालों में जीवन शैली और आर्थिक कारकों से परे पर्यटन के मूल्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बदल सकता है जीवन 

हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं है कि पर्यटन को मानसिक और शारीरिक तौर पर काफी उपयोगी माना गया है। ऐसे में कोविड के बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य में पर्यटन की पहचान करने का यह एक अच्छा समय है। डाक्टर वेन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सहयोगात्मक अनुसंधान की एक नई लाइन यह जांचना शुरू कर सकती है कि पर्यटन विभिन्न परिस्थितियों वाले लोगों के जीवन को कैसे बढ़ा और बदल सकता है।

अवासाद से लड़ने में मददगार 

डाक्टर वेन ने कहा कि हम पर्यटन और स्वास्थ्य विभाग के बीच अंतर कम कर कुछ नया करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि यह देखने के लिए और अधिक अनुभवजन्य शोध और सबूत होना चाहिए कि पर्यटन डिमेंशिया या अवसाद जैसी विभिन्न बीमारियों के लिए चिकित्सा में मददगार साबित कैसे हो सकता है। इसलिए यह साफ है कि टूरिज्म सिर्फ घूमने-फिरने का जरिया नहीं हैं बल्कि हमें यह सोचने की जरूरत है कि मार्डन सोसायटी में यह अपनी भूमिका कैसे निभा सकता है। 

Edited By: Krishna Bihari Singh