वाशिंगटन, रायटर। अमेरिका में 2016 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले खुफिया एजेंसियों को सात राज्यों में मतदाता पंजीकरण प्रणाली या वेबसाइट में रूसी हैकरों की घुसपैठ होने की जानकारी थी। लेकिन एजेंसी ने राज्यों को यह नहीं बताया। ये राज्य हैं- अलास्का, एरिजोना, कैलिफोर्निया, फ्लोरिडा, इलिनोइ, टेक्सास और विंकोंसिन। मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। हालांकि अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) ने रिपोर्ट का खंडन किया। उसने इसे तथ्यात्मक रूप से गलत और गुमराह करने वाला बताया है।

एनबीसी न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अपने कार्यकाल के अंतिम सप्ताह में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के आग्रह पर शीर्ष सीक्रेट इंटेलीजेंस ने यह बात कही। पहले घुसपैठ को लेकर केवल दो राज्यों एरिजोना और इलिनोइ की पहचान की गई थी। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने कहा कि रूस ने चुनाव में दखल देने के लिए हैकिंग और गलत सूचना का कार्यक्रम चलाया। बाद में इसके जरिये डेमोक्रेट उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को हराने के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप की मदद करने का प्रयास किया गया।

16 फरवरी को अमेरिका के विशेष वकील ने 13 रूसियों और तीन कंपनियों को चुनाव अभियान में छेड़छाड़ का दोषी पाया। इसमें सेंट पीटर्सबर्ग स्थित इंटरनेट एजेंसी शामिल है, जिसे सोशल मीडिया में ट्रोल के लिए जाना जाता है। सितंबर 2017 में ट्रंप प्रशासन ने सभी 50 राज्यों से पूछा था कि क्या उनकी चुनाव प्रणाली को निशाना बनाया गया। ट्रंप प्रशासन को बताया गया कि 21 राज्यों को निशाना बनाया गया और कुछ में सेंधमारी की गई।

एनबीसी न्यूज के मुताबिक, सात राज्यों में विभिन्न तरीके से घुसपैठ की गई थी। इसमें राज्यों की वेबसाइट और मतदाता पंजीकरण डाटाबेस में पहुंच शामिल है। सभी राज्यों और संघीय अधिकारियों का कहना है कि रूसी हैकरों ने मत में बदलाव नहीं किया और मतदाताओं के नाम सूची से नहीं हटाए।

 

Posted By: Tilak Raj

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