नई दिल्ली, आइएएनएस। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से जुड़े दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के सभी सदस्य देशों ने गुरुवार को सामूहिक रूप से कोरोना से लड़ने का संकल्प लिया। इस दौरान सदस्य देशों ने क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को और समृद्ध करने पर भी सहमति जताई।

बता दें कि कोरोना के प्रसार ने लगभग हर समुदाय को प्रभावित किया है। अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान से ना केवल गरीबों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है बल्कि इससे स्वास्थ्य की दृष्टि से कमजोर लोगों के जीवन पर भी खतरा मंडराने लगा है। 

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. ट्रेडोस अदनोम ने कहा कि संगठन ने हाल ही में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की प्राथमिकता को समझने के लिए एक सर्वे किया था, जिसमें आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की सभी देशों ने जरूरत बताई थी। सदस्य देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों और प्रतिनिधियों के साथ सामूहिक संकल्प पर हस्ताक्षर के दौरान डब्ल्यूएचओ के दक्षिण- पूर्व एशिया के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह ने कहा कि महामारी के दौर में भी लोगों की सामान्य स्वास्थ्य जरूरतें जस की तस बनी रहती हैं।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य तैयारियां केवल कोरोना जैसी आपदाओं को रोकने और उनसे निपटने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, इसका प्रयोग आपदाओं के दौरान सामान्य स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में भी किया जाना चाहिए। थाइलैंड की मेजबानी वाले 73वें रीजनल कमेटी सेशन के मंत्रिस्तरीय राउंड टेबल के दूसरे दिन सामूहिक संकल्प पर हस्ताक्षर किए गए। कोरोना के चलते इसे पहली बार वर्चुअल तौर पर आयोजित किया गया था। राउंडटेबल के दौरान सभी सदस्य देशों ने महामारी के दौरान किए गए प्रयासों को साझा किया। 

कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को हर तरह से प्रभावित किया है। कई देशों की आर्थिक गतिविधियों पर भी बुरा प्रभाव पड़ा है। लॉकडाउन हटने के बाद अब धीरे-धीरे चीजें सामान्य हो रही हैं मगर अभी इनको पूरी तरह से पहले जैसी स्थिति में आने में समय लगेगा। फिलहाल सभी देशों ने अपने यहां लॉकडाउन को खत्म करके चीजों को सामान्य करने की दिशा में कदम उठाना शुरू कर दिया है। 

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