हवाई यात्रा कितनी सुरक्षित? फ्लाइट उड़ाने के दौरान सो जाते हैं ज्यादातर पायलट, स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा
एक नई रिपोर्ट के अनुसार, उड़ान के दौरान बड़ी संख्या में पायलट सो जाते हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (एआई द्वारा निर्मित फोटो।)
डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। हाल ही में आई एक रिपोर्ट से पता चला है कि उड़ान के दौरान बड़ी संख्या में पायलट सो गए। ये चौंकाने वाली बात है। यूरोपियन कॉकपिट एसोसिएशन (ECA) के अनुसार, चार में से तीन से ज्यादा पायलट विमान उड़ाते समय सो गए।
इस हफ्ते जारी हुई एक स्टडी में पाया गया कि सर्वे में शामिल 7,200 पायलटों में से 76.8 प्रतिशत पायलट पिछले चार हफ्तों में कम से कम एक बार विमान के कंट्रोल पर बैठे-बैठे सो गए थे।
सुरक्षा का बड़ा खतरा
रिपोर्ट में उड़ान के दौरान ली गई ऐसी झपकी को माइक्रोस्लीप कहा गया है। नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, यह कुछ सेकंड की एक ऐसी छोटी और अनैच्छिक नींद होती है, जिसका पता खुद सोने वाले को भी नहीं चलता। यह स्थिति वाहन या विमान चलाने वालों के लिए सुरक्षा का बड़ा खतरा पैदा कर सकती है।
कुछ मामलों में ऐसा व्यक्ति जागता हुआ लग सकता है, यहां तक कि उसकी आंखें भी खुली हो सकती हैं लेकिन उसका दिमाग किसी भी जानकारी को प्रोसेस नहीं कर रहा होता। स्लीप फाउंडेशन के मुताबिक, नींद की कमी होने पर माइक्रोस्लीप होना एक आम लक्षण है।
लगातार थकान से आती है माइक्रोस्लीप
इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि उड़ान के दौरान माइक्रोस्लीप का एक बड़ा कारण थकान है। 38.8 प्रतिशत पायलटों ने बताया कि उन्हें अक्सर या हमेशा पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता, जिससे उनमें लगातार थकान बनी रहती है।
केवल 37.2 प्रतिशत पायलटों ने बताया कि जब वे अस्वस्थ या थका हुआ महसूस करते हैं तो वे इसकी रिपोर्ट करते हैं। वहीं, 24.2 प्रतिशत पायलटों ने कहा कि वे इसकी रिपोर्ट नहीं करते और फिर भी उड़ान भरते हैं। उन्होंने इसके मुख्य कारण के रूप में सजा मिलने और मैनेजमेंट की नाराजगी का डर बताया।
ईसीए के अध्ययन में कमांडर के विवेक से जुड़ी चिंताओं को उजागर किया गया है। यह एक ऐसा सुरक्षा नियम है, जिसके तहत फ्लाइट के मुख्य पायलट (पायलट-इन-कमांड) को कानूनी रूप से अपनी फ्लाइट ड्यूटी अवधि बढ़ाने और/या जरूरी आराम के समय को कम करने की छूट मिलती है।
नकारात्मक परिणाम के चलते पायलट नहीं कह पाते अपनी बात
सर्वे में शामिल लोगों में से 38.3 प्रतिशत ने बताया कि उन्होंने पिछले महीने में कम से कम एक बार कमांडर के विवेक का इस्तेमाल किया, जबकि 15.2 प्रतिशत ने बताया कि उन्होंने इसका इस्तेमाल दो या उससे ज्यादा बार किया। लगभग 69.1 प्रतिशत लोगों ने चिंता जताई कि अगर वे समय-सीमा बढ़ाने से मना करते हैं तो इसके नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं।
सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाए गए
इसके जवाब में यूरोपियन यूनियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी ने पीपल के साथ साझा किए गए एक बयान में कहा कि वह इन निष्कर्षों को गंभीरता से ले रही है। एजेंसी ने एयरलाइनों से आग्रह किया कि वे सटीक रिपोर्टिंग, परिचालन संबंधी उपायों और एक ऐसी सुरक्षा संस्कृति के जरिए थकान से जुड़े जोखिमों की पहचान करें और उन्हें प्रबंधित करें, जिसमें क्रू सदस्य बिना किसी बुरे परिणाम के डर के अपनी चिंताएं जाहिर कर सकें।
साल 2022 में इथियोपियन एयरलाइंस के बोइंग 737 विमान को उड़ा रहे दोनों पायलट कंट्रोल संभालते हुए सो गए, जिस वजह से वे विमान की लैंडिंग नहीं कर पाए। एविएशन एनालिस्ट एलेक्स माचेरास ने उड़ान के दौरान पायलटों के सो जाने को बेहद चिंताजनक बताया और इसके लिए पायलट की थकान को जिम्मेदार ठहराया।
यह ताजा रिपोर्ट विमानन क्षेत्र में कर्मचारियों के संकट के बीच आई है, क्योंकि इस उद्योग में पायलटों की भर्ती की तुलना में उनके छोड़ने की दर कहीं अधिक है। रिपोर्टों के अनुसार, इस साल मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर अपने चरम पर पहुंचने की उम्मीद है, जिससे 24,000 पायलटों की कमी हो सकती है।
