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अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद वाशिंगटन में फेरबदल की अटकलें, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का नाम शीर्ष पदों की रेस में

Published: Thu, 05 Nov 2026 04:22 PM (IST)

मिडटर्म चुनावों के बाद वाशिंगटन में संभावित फेरबदल के बीच, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का नाम ट्रंप प्रशासन में महत्वपूर्ण पदों के लिए चर्चा में है।

मिडटर्म के बाद ट्रंप प्रशासन में बड़े बदलाव की अटकलें

मिडटर्म के बाद ट्रंप प्रशासन में बड़े बदलाव की अटकलें

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संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीद से कमजोर प्रदर्शन के बाद, वाशिंगटन अब खुद को संभालने की तैयारी कर रहा है। इस बीच, ऐसी खबरें आ रही हैं कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में बड़ा बदलाव हो सकता है।

मिडटर्म चुनावों में मिली हार के बाद, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का नाम राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासन में किसी बड़े पद के लिए सामने आ रहा है। चर्चा है कि गोर को व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ या सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जैसी अहम जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।

सर्जियो गोर को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

द वाशिंगटन सन की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन के अंदरूनी मामलों की जानकारी रखने वाले 10 लोगों ने बताया है कि ट्रंप के कार्यकाल के दूसरे हिस्से में गोर को कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। गोर पहले भी व्हाइट हाउस में वरिष्ठ पद पर रह चुके हैं और ट्रंप के काफी करीबी माने जाते हैं।

स्टेट डिपार्टमेंट के अधिकारियों के बीच यह भी चर्चा है कि गोर प्रमोशन पाने के इच्छुक भी हैं।

प्रशासन में अच्छी पकड़ और ट्रंप तक सीधी पहुंच रखने वाले गोर, हाल ही के दिनों में कई उच्च-स्तरीय राजनयिक बैठकों में शामिल हुए हैं। इससे भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में उनकी भूमिका के दायरे के बाहर भी उनका प्रभाव बढ़ा है। गोर को मार्को रुबियो के भी काफी करीबी माने जाते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, गोर का नाम कई वरिष्ठ पदों के लिए लिया जा रहा है। इनमें मार्को रुबियो की जगह सेक्रेटरी ऑफ स्टेट बनना या सूसी वाइल्स की जगह व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ का पद संभालना शामिल है। कुछ अधिकारियों ने इस संभावना पर भी चर्चा की है कि वे क्रिस लैंडौ की जगह डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट का पद ले सकते हैं।

अटकलों के पीछे के कारण

प्रशासन में चर्चा है कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो 2028 या 2032 के राष्ट्रपति चुनाव की तैयारियों के सिलसिले में भविष्य में कैबिनेट छोड़ सकते हैं। वहीं, चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स और डिप्टी सेक्रेटरी क्रिस लैंडौ के पदों को लेकर भी कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे, हालांकि लैंडौ ने पद छोड़ने की खबरों को खारिज कर दिया है।

ट्रंप के एक सलाहकार के अनुसार, राष्ट्रपति गोर को बहुत पसंद करते हैं क्योंकि ट्रंप के सत्ता से बाहर रहने के दौरान गोर ने उनके लिए कई व्यावसायिक सौदे करने में मदद की थी। इसके अलावा, गोर डोनल्ड ट्रंप जूनियर के भी बेहद करीबी माने जाते हैं।

दावों को किया खारिज

इन सभी अटकलों के बीच सर्जियो गोर, विदेश विभाग और व्हाइट हाउस तीनों ने ही इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। गोर ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह से बकवास बताते हुए कहा, मुझे किसी अन्य पद या भूमिका में कोई दिलचस्पी नहीं है और न ही मैंने इस बारे में किसी से कोई चर्चा की है। उन्होंने मार्को रुबियो को सबसे योग्य विदेश मंत्री और अपना करीबी दोस्त बताया।

ग्लोबल पब्लिक अफेयर्स के असिस्टेंट सेक्रेटरी डायलन जॉनसन और व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने भी रिपोर्ट को अनाम सूत्रों पर आधारित और फर्जी करार दिया। उनका कहना है कि रुबियो और वाइल्स अपने पदों पर बेहतरीन काम कर रहे हैं और गोर के साथ उनके संबंध काफी मजबूत हैं।

हालांकि आधिकारिक तौर पर इन खबरों का खंडन किया गया है, लेकिन वाशिंगटन और विदेश विभाग के गलियारों में सर्जियो गोर की बढ़ती राजनयिक पहचान और ट्रंप प्रशासन में उनका बढ़ता कद लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।

गोर का प्रभाव और राजनयिक भूमिका

सर्जियो गोर पहले भी व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ प्रेसिडेंशियल पर्सनल में वरिष्ठ पद पर कार्य कर चुके हैं, जहाँ वे प्रशासनिक नियुक्तियों और उम्मीदवारों की जांच के जिम्मेदार थे। ट्रंप प्रशासन में उनकी सीधी पहुंच और राष्ट्रपति के साथ करीबी रिश्तों ने उनका प्रभाव बढ़ाया है।

नवंबर 2025 में नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास की कमान संभालने के बाद, गोर ने भारत में कई उच्च-स्तरीय राजनयिक दौरों को सफल बनाया है। इनमें विदेश मंत्री मार्को रुबियो, वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक और तत्कालीन सेना सचिव डैन ड्रिस्कॉल के दौरे शामिल हैं।

भारत में राजदूत होने के साथ-साथ, वे दक्षिण और मध्य एशिया के लिए विशेष दूत (स्पेशल एनवॉय) की भूमिका भी निभा रहे हैं। सोवियत संघ के दौर के उज्बेकिस्तान में जन्मे गोर ने अपनी पृष्ठभूमि और क्षेत्रीय संपर्कों का इस्तेमाल मध्य एशियाई देशों के साथ अमेरिकी संबंधों को गहरा करने में किया है। हाल ही में उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ बैठकों में भाग लिया और अटलांटा में G20 शिखर सम्मेलन तथा उज्बेकिस्तान दौरे पर रुबियो के साथ नजर आए थे।

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीद से कमजोर प्रदर्शन के बाद, वाशिंगटन अब खुद को संभालने की तैयारी कर रहा है। इस बीच, ऐसी खबरें आ रही हैं कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में बड़ा बदलाव हो सकता है।
मिडटर्म चुनावों में मिली हार के बाद, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का नाम राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासन में किसी बड़े पद के लिए सामने आ रहा है। चर्चा है कि गोर को व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ या सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जैसी अहम जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। 
सर्जियो गोर को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
द वाशिंगटन सन की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन के अंदरूनी मामलों की जानकारी रखने वाले 10 लोगों ने बताया है कि ट्रंप के कार्यकाल के दूसरे हिस्से में गोर को कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। गोर पहले भी व्हाइट हाउस में वरिष्ठ पद पर रह चुके हैं और ट्रंप के काफी करीबी माने जाते हैं। 
स्टेट डिपार्टमेंट के अधिकारियों के बीच यह भी चर्चा है कि गोर प्रमोशन पाने के इच्छुक भी हैं। 
प्रशासन में अच्छी पकड़ और ट्रंप तक सीधी पहुंच रखने वाले गोर, हाल ही के दिनों में कई उच्च-स्तरीय राजनयिक बैठकों में शामिल हुए हैं। इससे भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में उनकी भूमिका के दायरे के बाहर भी उनका प्रभाव बढ़ा है। गोर को मार्को रुबियो के भी काफी करीबी माने जाते हैं। 
रिपोर्ट के मुताबिक, गोर का नाम कई वरिष्ठ पदों के लिए लिया जा रहा है। इनमें मार्को रुबियो की जगह सेक्रेटरी ऑफ स्टेट बनना या सूसी वाइल्स की जगह व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ का पद संभालना शामिल है। कुछ अधिकारियों ने इस संभावना पर भी चर्चा की है कि वे क्रिस लैंडौ की जगह डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट का पद ले सकते हैं।
अटकलों के पीछे के कारण
प्रशासन में चर्चा है कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो 2028 या 2032 के राष्ट्रपति चुनाव की तैयारियों के सिलसिले में भविष्य में कैबिनेट छोड़ सकते हैं। वहीं, चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स और डिप्टी सेक्रेटरी क्रिस लैंडौ के पदों को लेकर भी कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे, हालांकि लैंडौ ने पद छोड़ने की खबरों को खारिज कर दिया है। 
ट्रंप के एक सलाहकार के अनुसार, राष्ट्रपति गोर को बहुत पसंद करते हैं क्योंकि ट्रंप के सत्ता से बाहर रहने के दौरान गोर ने उनके लिए कई व्यावसायिक सौदे करने में मदद की थी। इसके अलावा, गोर डोनल्ड ट्रंप जूनियर के भी बेहद करीबी माने जाते हैं।
दावों को किया खारिज
इन सभी अटकलों के बीच सर्जियो गोर, विदेश विभाग और व्हाइट हाउस तीनों ने ही इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। गोर ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह से बकवास बताते हुए कहा, मुझे किसी अन्य पद या भूमिका में कोई दिलचस्पी नहीं है और न ही मैंने इस बारे में किसी से कोई चर्चा की है। उन्होंने मार्को रुबियो को सबसे योग्य विदेश मंत्री और अपना करीबी दोस्त बताया।
ग्लोबल पब्लिक अफेयर्स के असिस्टेंट सेक्रेटरी डायलन जॉनसन और व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने भी रिपोर्ट को अनाम सूत्रों पर आधारित और फर्जी करार दिया। उनका कहना है कि रुबियो और वाइल्स अपने पदों पर बेहतरीन काम कर रहे हैं और गोर के साथ उनके संबंध काफी मजबूत हैं।
हालांकि आधिकारिक तौर पर इन खबरों का खंडन किया गया है, लेकिन वाशिंगटन और विदेश विभाग के गलियारों में सर्जियो गोर की बढ़ती राजनयिक पहचान और ट्रंप प्रशासन में उनका बढ़ता कद लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।

गोर का प्रभाव और राजनयिक भूमिका
सर्जियो गोर पहले भी व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ प्रेसिडेंशियल पर्सनल में वरिष्ठ पद पर कार्य कर चुके हैं, जहाँ वे प्रशासनिक नियुक्तियों और उम्मीदवारों की जांच के जिम्मेदार थे। ट्रंप प्रशासन में उनकी सीधी पहुंच और राष्ट्रपति के साथ करीबी रिश्तों ने उनका प्रभाव बढ़ाया है।
नवंबर 2025 में नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास की कमान संभालने के बाद, गोर ने भारत में कई उच्च-स्तरीय राजनयिक दौरों को सफल बनाया है। इनमें विदेश मंत्री मार्को रुबियो, वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक और तत्कालीन सेना सचिव डैन ड्रिस्कॉल के दौरे शामिल हैं। 
भारत में राजदूत होने के साथ-साथ, वे दक्षिण और मध्य एशिया के लिए विशेष दूत (स्पेशल एनवॉय) की भूमिका भी निभा रहे हैं। सोवियत संघ के दौर के उज्बेकिस्तान में जन्मे गोर ने अपनी पृष्ठभूमि और क्षेत्रीय संपर्कों का इस्तेमाल मध्य एशियाई देशों के साथ अमेरिकी संबंधों को गहरा करने में किया है। हाल ही में उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ बैठकों में भाग लिया और अटलांटा में G20 शिखर सम्मेलन तथा उज्बेकिस्तान दौरे पर रुबियो के साथ नजर आए थे।

 

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