टोरंटो, आइएएनएस। अक्सर देखा जाता है कि कई लोग शरीर की जरूरत के मुताबिक पानी नहीं पीते हैं। बीमारी होने पर दवाएं तो खा लेते हैं पर पानी के स्तर का तब भी ध्यान नहीं रखते। ऐसे में दवाएं सीधा किडनी पर असर कर उनकी कार्यक्षमता को प्रभावित करती हैं। पानी की कमी के कारण शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों की जांच के लिए वैज्ञानिकों ने ‘कंप्यूटर किडनी’ विकसित की है। यह एक ऐसा मॉडल है, जो कम पानी पीने वाले लोगों पर दवाओं के प्रभावों के बारे में भी बताएगा।

पानी का संतुलन जरूरी

शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने के लिए किडनी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। साथ ही यह डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) के दौरान भी बहुत कम पानी का उपयोग करते हुए शरीर के भीतर मौजूद गंदगी को बाहर निकालने में मदद करती है। जिन लोगों को किडनी से संबंधित समस्या होती है और जो लोग रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए दवाएं लेते हैं। उनके शरीर में कई बार पानी का संतुलन बिगड़ जाता है। वैज्ञानिकों ने कहा कि ऐसे मरीजों को उचित दवाएं लेने के साथ-साथ शरीर में पानी की मात्रा का भी ध्यान रखना बेहद जरूरी है। असंतुलन की स्थिति में लोग कई अन्य बीमारियों के शिकार भी हो सकते हैं।

ऐसे दुरुस्‍त रहता है रक्‍तचाप

यह अध्ययन अमेरिकन जर्नल ऑफ फिजियोलॉजी-रिनल फिजियोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ वाटरलू के अप्लाइड मैथमेटिक्स फार्मेसी एंड बायोलॉजी विभाग की प्रोफेसर अनीता लायटन ने कहा, ‘जिन लोगों को उच्च रक्तचाप की शिकायत होती है उन्हें आमतौर पर पानी की गोलियां दी जाती हैं, इसलिए वे अपने रक्त के घनत्व से ज्यादा यूरिन (पेशाब) करते हैं। इससे उन्हें रक्तचाप कम रखने में मदद मिलती है।’

दवाएं बिगाड़ती हैं हार्मोनल सिस्टम

लायटन के कहा कि रक्तचाप के मरीजों को अन्य दवाएं देने से उनका हार्मोनल सिस्टम प्रभावित होता है और इसका प्रभाव किडनी पर भी पड़ता है। अक्सर देखा जाता है कि लोग एक उम्र के बाद रक्तचाप की एक-दो दवाएं खाते रहते हैं। उन्हें लगता है कि इससे वे स्वस्थ रहेंगे, लेकिन एक दिन यदि उन्हें सिर दर्द हो जाए तो ऐसे में वे एस्प्रिन ले सकते हैं। ये तीनों दवाएं मिलकर उनकी किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

एस्प्रिन से प्रभावित होने लगती है किडनी

इस समस्या से बचने के लिए लायटन ने एक नया मॉडल बनाया, जो यह दिखाता है कि मांसपेशियों के सिकुड़ने से यूरिन किडनी से ब्लाडर (मूत्राशय) में आ जाता है। इस दौरान यह भी पाया गया है कि जब तक मरीज पूरी तरह से हाइड्रेट नहीं होता है तो वह रक्तचाप नियंत्रित करने के लिए दो दवाएं लेता है। ऐसे में यदि वह एस्प्रिन लेता है तो इसका किडनी पर सीधा प्रभाव पड़ता है और उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है। उन्होंने कहा कि किडनी पर यह प्रभाव तभी पड़ता है जब शरीर में पानी का संतुलन ठीक नहीं होता। ऐसे में शरीर के विषाक्त पदार्थ भी बाहर नहीं निकल पाते। लायटन ने कहा इसके लिए हमें चाहिए कि पर्याप्त मात्र में समय-समय पर पानी पीते रहें।

Posted By: Krishna Bihari Singh

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