द न्यूयॉर्क टाइम्स, वाशिंगटन। सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी इकलौते व्यक्ति नहीं थे, जिन्हें सऊदी प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान का विरोध करने के कारण जान गंवानी पड़ी। सऊदी प्रिंस ने अपने कई विरोधियों को शिकार बनाया है। उनके इशारे पर कई सऊदी नागरिकों की जासूसी की गई। कई विरोधियों का अपहरण कर उन्हें प्रताड़ित भी किया गया। खुफिया दस्तावेजों के हवाले से अमेरिकी अधिकारियों ने यह दावा किया है।

अमेरिकी अधिकारियों और कुछ पीडि़तों के करीबियों का कहना है कि प्रिंस सलमान ने अपने विरोधियों को दबाने की मुहीम चलाई है। खशोगी की हत्या इसी अभियान का हिस्सा थी। जिन लोगों ने खशोगी की हत्या कर उनके शव के टुकड़े किए थे, वे सऊदी प्रिंस के कई अन्य विरोधियों को खत्म करने में भी शामिल रहे हैं। जिस टीम के लोगों ने खशोगी की हत्या की, उसे अमेरिकी अधिकारियों ने सऊदी रैपिड इंटरवेंशन ग्रुप नाम दिया है। 2017 से अब तक इस टीम ने ऐसी करीब दर्जनभर घटनाओं को अंजाम दिया है।

कुछ मामलों में विरोधी को अन्य अरब देशों से जबर्दस्ती प्रत्यर्पित कराया गया और हिरासत में ले लिया गया। विरोधियों को प्रिंस के महल में लाकर प्रताड़ित किया गया। अमेरिका की खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी में महिलाओं की स्थिति पर ब्लॉग लिखने वाली एक यूनिवर्सिटी लेक्चरर भी इस ग्रुप की शिकार हुई थी। प्रताड़ना से त्रस्त होकर उसने पिछले साल आत्महत्या करने की कोशिश भी की थी। यह रैपिड इंटरवेंशन ग्रुप अपने काम से इतना उत्साहित था कि उसने एक करीबी के जरिये सऊदी प्रिंस से ईद पर अपने लिए बोनस भी मांगा था।

इंटरवेंशन ग्रुप ने आदेश मिले बिना कर दी थी खशोगी की हत्या
सऊदी सरकार का कहना है कि अमेरिका में रहने वाले पत्रकार खशोगी की हत्या का आदेश प्रिंस ने नहीं दिया था। रैपिड ग्रुप ने खुद उनकी हत्या का फैसला कर दिया था। सऊदी ने इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है। इस मामले में 11 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। वहीं तुर्की और अमेरिका की खुफिया एजेंसियों का कहना है कि खशोगी की हत्या सोची-समझी रणनीति के तहत की गई थी।

Posted By: Ravindra Pratap Sing

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