वाशिंगटन, न्यूयॉर्क टाइम्स। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अपने संबंधों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद से ही डोनाल्ड ट्रंप पर रूस से साठगांठ करने का आरोप लगता रहा है। दोनों नेताओं की अकेले में हुई पिछली पांच मुलाकातों से यह शक और गहरा गया है।

ट्रंप ने सबसे पहले जर्मनी में पुतिन से मुलाकात की थी। वार्ता के बाद उन्होंने अनुवादक को कोई भी जानकारी सार्वजनिक ना करने को कहा था। उसी दिन दोनों नेता डिनर पर भी मिले थे जहां कोई भी अन्य अमेरिकी अधिकारी मौजूद नहीं था।

इसके बाद वियतनाम व फिनलैंड में हुई बैठक में भी यही स्थिति थी। हाल में ट्रंप अर्जेटीना में पुतिन से मिले थे। तब रूस को आक्रमक बताते हुए उन्होंने पुतिन से दुबारा ना मिलने की बात की थी। दोनों नेताओं की इन खुफिया मुलाकातों ने 2016 चुनाव में रूस व ट्रंप के बीच गठजोड़ के आरोपों की जांच कर रहे रॉबर्ट मूलर का ध्यान खींचा है। ट्रंप प्रशासन व पार्टी के भी कई लोग उनपर शक कर रहे हैं। 

पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के सलाहकार रह चुके एंड्रयू एस वीस ने कहा, 'पुतिन के साथ मुलाकात के दौरान ट्रंप किसी भी मंत्रालय या ह्वाइट हाउस के अधिकारी की उपस्थिति नहीं चाहते थे। इसका मतलब है कि वह देशहित की बात नहीं कर रहे थे बल्कि कुछ गड़बड़ चल रहा था।' हाल ही में सामने आया था कि ट्रंप और रूस के संबंधों को लेकर संघीय जांच एजेंसी (एफबीआई) भी जांच कर रही है। ट्रंप हमेशा इन आरोपों से इन्कार करते आए हैं।

आइएनएफ संधि को बचाने के लिए अमेरिका के साथ काम करने को तैयार रूस
मॉस्को:
रूस ने इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज ट्रीटी (आइएनएफ) को बचाए रखने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर काम करने की बात की है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि दोनों देशों की बातचीत में यूरोप को सहयोग करना चाहिए। अमेरिका व रूस ने 1987 में यह संधि की थी। पिछले महीने अमेरिका ने रूस पर समझौता तोड़ने का आरोप लगाते हुए संधि रद करने की धमकी दी थी। रूस ने हालांकि, इन आरोपों से इन्कार किया है।

 

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