इस्लामाबाद में चल रही थी शांति वार्ता, उधर ट्रंप को दर्जनों बार कॉल रहे थे जेडी वेंस; क्या थी वजह?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ईरान के साथ शांति वार्ता के दौरान अपनी टीम के साथ लगातार संपर्क में थे। उपराष्ट्रपति ...और पढ़ें

शांति वार्ता के दौरान टीम से लगातार संपर्क में थे ट्रंप। ( यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान के साथ शांति वार्ता के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप खुद इस्लामाबाद में मौजूद नहीं थे, लेकिन वह अपनी उस टीम के साथ लगातार संपर्क में थे जो बातचीत का नेतृत्व कर रही थी। जिनका मकसद मिडिल ईस्ट में संघर्ष के खत्म करना था।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान में ईरान के साथ बातचीत के दौरान ट्रंप से दर्जनों बार बात की।
वेंस ने कहा कि ईरान के साथ 21 घंटे की बातचीत के दौरान कोई खास प्रगति नहीं हुई, जबकि मडिल ईस्ट में सीजफायर की स्थिति नाजुक बनी हुई है। हमें राष्ट्रपति ट्रंप ने नेक नीयत से यहां भेजा था, हम नेक नीयत से यहां आए थे, उन्होंने हमारी शर्ते मानने से इनकार कर दिया।
शांति वार्ता के दौरान लगातार संपर्क में थे ट्रंप- वेंस
जब उनसे पूछा गया कि शांति वार्ता के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से कितनी बार बात की, तो वेंस ने कहा, 'हम लगातार राष्ट्रपति से बात कर रहे थे। मुझे ठीक-ठीक याद नहीं है कि हमने उनसे कितनी बार बात की। पिछले 21 घंटों में शायद 6 बार या दर्जन भर बार।' वेंस ने बताया कि प्रतिनिधि मंडल ने एडमिरल ब्रैड कूपर, युद्ध सचिव पीट हेगसेथ, विदेश सचिव मार्को रूबियो और पूरी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम से भी बात की।
बातचीत के बारे में बताते हुए वेंस ने कहा, 'हम अपनी टीम के साथ लगातार संपर्क में थे, क्योंकि हम पूरी ईमानदारी से बातचीत कर रहे थे। अब हम बहुत ही सीधे-साधे प्रस्ताव के साथ लौट रहे हैं। समझौते का एक ऐसा तरीका जो हमारा अंतिम और बेहतरीन प्रस्ताव है।'
क्यों विफल हुई शांति वार्ता?
बेंस ने अपने बयान में कहा, 'बुरी खबर यह है कि किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं, और मुझे लगता है कि यह ईरान के लिए ज्यादा बुरी खबर है, न कि अमेरिका के लिए। इसलिए हम बिना किसी समझौते पर पहुंचे अमेरिका वापस जा रहे हैं।
'हमने बहुत साफ कर दिया है कि रेड लाइन्स क्या हैं, किन चीजों पर हम उनके साथ समझौता करने को तैयार हैं और किन चीजों पर नहीं। हमने इसे जितना हो सके उतना साफ कर दिया है, लेकिन उन्होंने हमारी शर्तें मानने से इनकार कर दिया है।'
ईरान ने अमेरिका पर मढ़ा दोष
ईरान ने बातचीत की विफलता का दोष अमेरिका की अनुचित मांगों पर मढ़ा। ईरान के सरकारी मीडिया IRIB ने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कई पहलें सामने रखीं, लेकिन अमेरिकी पक्ष ने प्रगति को रोक दिया, जिससे बातचीत बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई।
