नई दिल्ली, एजेंसी। रुसी रक्षा मंत्रालय पेंटागन (Pentagon)ने सऊदी अरब की सऊदी अरामको (Saudi Aramco Attack)तेल प्लांट पर हुए ड्रोन और मिसाइल से आतंकी हमले के बाद अपने यहां लगाए गए पैट्रियट सिस्टम को बदल दिया है। सऊदी अरब ने अपने प्लांट की सुरक्षा के लिए यहां पर दो पैट्रियट सिस्टम लगाए थे लेकिन इसके बावजूद बीते 14 सितंबर को आंतकियों ने मिसाइल और ड्रोन हमले से इस प्लांट को नुकसान पहुंचाया, इस हमले की वजह से प्लांट के दो संयंत्रों को नुकसान पहुंचा था, इसको ठीक करने में कंपनी को एक सप्ताह से अधिक का समय लग गया। अब यहां हुए नुकसान को ठीक करने के बाद फिर से काम शुरु कर दिया गया है। 

कम क्षमता के मिले लगाए गए सिस्टम 

रक्षा मंत्रालय की ओर से कहा गया कि सऊदी अरब की ओर से प्लांट की सुरक्षा के लिए जो सिस्टम लगाए गए थे वो कम क्षमता के थे जिसकी वजह से वो यहां पर हुए हमले को नहीं रोक पाए। यदि यहां लगाई गई मिसाइलों की क्षमता अधिक होती है तो इस तरह के हमलों को नाकाम कर दिया जाता। प्रशांत वायु सेना (PACAF)के कमांडर जनरल चार्ल्स ब्राउन ने एक इंटरव्यू में कहा है कि वह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को छोटे परमाणु रिएक्टर हथियारों से लैस करने की योजना बना रहे हैं जिससे आतंकियों के किसी भी हमले को नाकाम किया जा सके। उनका कहना है कि इस तरह के हथियारों से लैस कर दिए जाने के बाद सुरक्षा बेहतर हो सकेगी। उनका सुझाव है कि ऐसे सिस्टम बड़े और भारी इंटरसेप्टर-आधारित सिस्टम से अधिक प्रभावी हो सकते हैं। 

दुनिया की बड़ी कंपनियों में से एक 

सऊदी अरामको कंपनी दुनिया की कुछ चुनिंदा बड़ी कंपनियों में से एक है। सऊदी अरामको प्लांट पर सुरक्षा के लिए जो चीजें तैनात की गई थी वो उसे रोकने में पूरी तरह से नाकाम रहे, इस वजह से इस कंपनी की प्रतिष्ठा को काफी धक्का लगा था। ये दुनिया की महत्वपूर्ण कंपनियों में से एक है उसके बाद आतंकी इसे निशाना बनाने में कामयाब रहे। इस कंपनी में अमेरिका की भी भागीदारी है। इस वजह से ये सवाल उठ रहे थे कि इतनी बड़ी कंपनी की सुरक्षा पर खास ध्यान नहीं दिया गया जिसके कारण आतंकी यहां हमला करने में कामयाब हुए। इस घटना के बाद अमेरिका ने सऊदी अरब में एक अतिरिक्त बटालियन तैनात करके वहां सुरक्षा बढ़ाई। 

नए सिस्टम से रोका जा सकेगा ऐसा हमला 

हालांकि, इजरायल के वायु रक्षा प्रणालियों के इंजीनियर उजी रुबिन ने डिफेंस न्यूज मीडिया आउटलेट के साथ एक इंटरव्यू में संकेत दिया कि इस तरह के हमलों के खिलाफ सिस्टम अप्रभावी हैं क्योंकि टारगेट आसमान से नीचे जा रहे थे, इस तरह के हमलों को पैट्रियट राडार से निष्क्रिय नहीं किया जा सकता है वो उसे नहीं पकड़ पाते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि रूसी पैंटीर एस 1 (नाटो रिपोर्टिंग नाम SA-22 ग्रेहाउंड) जैसे कुछ उपकरण इस तरह की चीजों को पकड़ने में भी सक्षम है क्योंकि इनमें दोहरी 2A38M 30मिलीमीटर के स्वचालित सिस्टम लगे हैं। ये उपकरण इस तरह की आधुनिक सुविधाओं से लैस है जो नीचे आने वाले ड्रोन और मिसाइलों को भी रोकने में सक्षम है। 

हमले रोकने में नाकाम रहे लगे सिस्टम 

इससे पहले, रूसी रक्षा मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा कि पैट्रियट्स अरामको प्लांट पर हुए हमले को रोकने में विफल रहे, इस वजह से कंपनी की उत्पादन क्षमता कुछ दिनों के लिए कम हो गई थी। उनका कहना था कि अरामको प्लांट पर लगे जिन हथियारों से इस तरह के हमलों को रोकने में सक्षम होने की बात कही गई थी वो उसमें फेल रहे। इस वजह से उनकी क्षमता को भी लेकर सवाल उठे क्योंकि उनकी जो क्षमताएं बताई गई थी वो वास्तविक क्षमताओं से मेल खाते हुए नहीं मिले। इस वजह से प्लांट को इतना नुकसान हुआ। अब इसे पूरी तरह से बदल दिया गया है।  

Posted By: Vinay Tiwari

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