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न्यूक्लियर, नेतन्याहू और नवंबर... टकर कार्लसन ने एक बार फिर परमाणु युद्ध को लेकर दी चेतावनी

Published: Tue, 03 Nov 2026 02:00 AM (IST)

टकर कार्लसन ने चेतावनी दी है कि वॉशिंगटन डीसी में 'न्यूक्लियर क्लॉक' चल रही है और अमेरिकी राष्ट्रपति नेतन्याहू के दबाव में ईरान पर परमाणु हमला करने के करीब हैं।

बेंजामिन नेतन्याहू और डोनल्ड ट्रंप। (फाइल फोटो।)

बेंजामिन नेतन्याहू और डोनल्ड ट्रंप। (फाइल फोटो।)

HighLights

  1. टकर कार्लसन का दावा, अमेरिका ईरान पर परमाणु हमले के करीब

  2. नेतन्याहू के दबाव में ईरान पर परमाणु हमले की आशंका जताई

  3. तीसरे विश्व युद्ध की चेतावनी, पर सबूतों का अभाव

डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। फॉक्स न्यूज के पूर्व होस्ट और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के वफादार रहे टकर कार्लसन का कहना है कि वॉशिंगटन डीसी में कहीं न्यूक्लियर क्लॉक चल रही है। उनके अनुसार, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दबाव में अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान पर परमाणु हमला करने का आदेश देने के बहुत करीब हो सकते हैं।

कार्लसन के अनुसार, उनका निशाना पिकएक्स माउंटेन है, जो ईरान की नतान्ज परमाणु सुविधा के पास बना एक बेहद सुरक्षित भूमिगत परिसर है। कार्लसन ने एक्स पर एक लंबी पोस्ट में एक जानकार व्यक्ति के हवाले से कहा कि बीबी (नेतन्याहू) इस बारे में रोजाना ट्रंप को फोन करते हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले हफ्ते आए चुनाव नतीजों के बाद इजरायली प्रधानमंत्री घिर गए हैं और हताश हैं और जब तक ट्रंप उनकी मदद नहीं करते, वे सरकार नहीं बना सकते।

'परमाणु हमला की एकमात्र विकल्प'

कार्लसन ने लिखा, "एकमात्र सैन्य विकल्प परमाणु हमला है।" उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन ने फरवरी से चुपचाप अमेरिकी परमाणु सिद्धांत में बदलाव किया है, ताकि युद्ध के मैदान में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करना आसान हो सके। कार्लसन ने अपने इस डरावने दावे में भारत, पाकिस्तान और अन्य देशों को भी घसीट लिया।

'छिड़ सकता है तीसरा विश्वयुद्ध'

उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका के हमले से फारस की खाड़ी (पर्सियन गल्फ) में रेडियोधर्मी प्रदूषण फैल सकता है, जिससे रूस, भारत, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया के शामिल होने वाला परमाणु टकराव शुरू हो सकता है और तीसरा विश्व युद्ध छिड़ सकता है।

उन्होंने लिखा, "पहले परमाणु हमले के बाद तीसरा विश्व युद्ध होना तय है। वह युद्ध छोटा और निर्णायक होगा।" हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि इसमें बाकी देश क्यों शामिल होंगे। कार्लसन कई महीनों से इसी तरह की चेतावनी दे रहे हैं। मानो वे कह रहे हों कि दुनिया का अंत (आर्मागेडन) भी अपने तय समय पर नहीं आ पाता।

दावे बड़े लेकिन सबूत कोई नहीं

ट्रम्प और उनके 'MAGA' समर्थकों की जोखिम भरी हरकतों के बावजूद नीति-निर्धारकों के गंभीर हलकों में उनकी इस नई पोस्ट का मजाक उड़ाया गया। असल में इन दावों की गंभीरता और उन्हें साबित करने के लिए दिए गए सबूतों के बीच बहुत बड़ा अंतर है।

न तो व्हाइट हाउस और न ही पेंटागन ने परमाणु नीति में किसी बदलाव की पुष्टि की है। कार्लसन ने किसी अमेरिकी अधिकारी का नाम नहीं लिया, कोई दस्तावेजी सबूत नहीं दिया और अपने मुख्य दावों के लिए गुमनाम सूत्रों पर निर्भर रहे।

अक्टूबर में ट्रंप ने खुद न्यूजमैक्स से कहा था, "मैं परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करूंगा। हमें ऐसा करने की जरूरत ही नहीं है।" फिर भी अमेरिका के कट्टरपंथी कई महीनों से ईरान के साथ परमाणु टकराव की आशंका जता रहे हैं। वे बार-बार यह डर फैला रहे हैं कि ईरान कुछ ही हफ्तों या महीनों में परमाणु हथियार हासिल कर लेगा।

मार्च में कार्लसन ने नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के पूर्व निदेशक जो केंट का एक इंटरव्यू लिया था, जो काफी कुछ उजागर करने वाला था। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान परमाणु हथियार हासिल करने के बहुत करीब था तो केंट ने जवाब दिया, "नहीं, तीन हफ्ते पहले जब यह सब शुरू हुआ तब भी वे ऐसा नहीं करने वाले थे और जून में भी ऐसी कोई स्थिति नहीं थी।"

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी कोई खुफिया जानकारी नहीं है जिससे पता चले कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने के खिलाफ अपनी नीति को छोड़ने वाला है।

इंटरनेट पर वायरल हो रहा मीम

ईरान के कुछ ही हफ्तों में परमाणु हथियार हासिल कर लेने का अमेरिकी डर अब एक अलग ही रूप ले चुका है। इंटरनेट पर एक मीम काफी वायरल हो रहा है, जिसमें 1750 ईसा पूर्व की एक प्राचीन पत्थर की तख्ती दिखाई गई है, जिस पर लिखा है, "ईरान परमाणु हथियार बनाने से बस कुछ ही हफ्ते दूर है।"

एक और कहानी के अनुसार, पुरातत्वविदों को 3,000 साल पुरानी एक ऐसी पट्टिका मिली है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि फारस (ईरान) परमाणु बम बनाने के बहुत करीब है। कार्लसन पर यह आरोप भी है कि परमाणु खतरे को लेकर शोर मचाने के पीछे उनका अपना कोई एजेंडा है।

ट्रंप से कार्लसन के मतभेद

कभी ट्रंप के सबसे उत्साही मीडिया समर्थकों में से एक रहे कार्लसन अब MAGA आंदोलन के भीतर सबसे प्रभावशाली असहमति जताने वाली आवाजों में से एक बन गए हैं और इजरायल और ईरान के मुद्दे पर ट्रंप से उनका मतभेद विशेष रूप से स्पष्ट रहा है।

कार्लसन का तर्क है कि अमेरिका को अपनी विदेश नीति को इजरायली हितों के अधीन नहीं करना चाहिए और न ही उसे मध्य-पूर्व के किसी और युद्ध में घसीटा जाना चाहिए।

उन्होंने वॉशिंगटन में नेतन्याहू के प्रभाव पर हमला बोला है, अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के औचित्य पर सवाल उठाए हैं और रिपब्लिकन रूढ़िवादियों के बीच लंबे समय से चली आ रही इस धारणा को चुनौती दी है कि इजरायल का समर्थन करना एक ऐसा अटूट विश्वास है जिस पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता।

यहां बड़े वैचारिक मतभेद भी मौजूद हैं। MAGA का एक धड़ा मानता है कि अमेरिका फर्स्ट का मतलब विदेशी मामलों, खासकर इजरायल के लिए लड़े जाने वाले युद्धों से दूर रहना है। वहीं दूसरा धड़ा इजरायल को बिना शर्त समर्थन देने को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और रूढ़िवादी राजनीति का अहम हिस्सा मानता है।

इस लड़ाई में कार्लसन एक विवादित केंद्र बन गए हैं। आलोचकों का आरोप है कि वे इजरायल-विरोधी साजिशी बातें फैलाते हैं, जबकि उनके समर्थकों का मानना है कि वे स्थापित सोच को चुनौती दे रहे हैं।

यह भी पढ़ें: 'अब युद्ध लंबा खिंच सकता है...', ट्रंप के बयान पर ईरान की खुली चेतावनी 

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