विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

न्यूक्लियर से लेकर मिनरल्स तक... भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर जयशंकर और रूबियो ने किन मुद्दों पर की बात?

Published: Wed, 04 Feb 2026 08:01 AM (IST)

विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने वॉशिंगटन में मुलाकात की। उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का ...और पढ़ें

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील साइन होने से पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच वॉशिंगटन में मुलाकात हुई। दोनों के बीच रेयर मिनरल्स की खोज, माइनिंग और प्रोसेसिंग पर द्विपक्षीय सहयोग को औपचारिक रूप देने पर चर्चा की।

जयशंकर के मुताबिक, बातचीत के दौरान भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के कई पहलुओं पर चर्चा हुई, जिसमें व्यापार, ऊर्जा, परमाणु, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और टेक्नोलॉजी शामिल हैं। एक्स पर एक पोस्ट में विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों नेता हमारे साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग मैकेनिज्म की जल्द मीटिंग करने पर सहमत हुए।

पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुए समझौते का किया स्वागत

प्रधान उप प्रवक्ता टॉमी पिगोट की ओर से जारी बयान में बताया गया कि रूबियो और जयशंकर ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का स्वागत किया। बयान में कहा गया है, "दोनों नेताओं ने नए आर्थिक अवसर खोलने और हमारे साझा एनर्जी सिक्योरिटी लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए हमारे लोकतंत्रों के एक साथ काम करने के महत्व पर जोर दिया।"

बयान में कहा गया है, "सेक्रेटरी रूबियो और मंत्री जयशंकर ने क्वाड के जरिए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए अपनी बैठक खत्म की। उन्होंने माना कि हमारे साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए एक समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र बहुत जरूरी है।"

भारत-अमेरिका के बीच आ गया था तनाव

सनद रहे कि पिछले नौ-दस महीनों में भारत और अमेरिका के रिश्तों में काफी तनाव आ गया था। इसका मुख्य कारण कारोबारी वार्ता में गतिरोध और अमेरिका द्वारा लगाया गया उच्च टैरिफ (50 प्रतिशत तक) था।

ट्रंप प्रशासन की तरफ से पाकिस्तान को वॉशिंगटन में महत्व दिए जाने और भारत के इन्कार किए जाने के बावजूद ट्रंप की तरफ से भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध समाप्त करने के बार-बार के दावे से भी भारत में चिंता बढ़ी थी।

हालांकि अमेरिका के नेतृत्व में क्रिटिकल मिनरल्स पर होने वाली अहम बैठक में पाकिस्तान को आमंत्रित नहीं किया गया है। यह स्पष्ट संकेत है कि अमेरिका ने भारत की संवेदनशीलताओं का सम्मान किया है और रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता दी है।

यह भी पढ़ें: ट्रेड वॉर में भारत की जीत: अमेरिका-ईयू के बीच फंसा भारत बना 'ग्लोबल प्लेयर', दोनों शक्तियों से हासिल की ऐतिहासिक डील