नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। यदि सब कुछ प्‍लान के मुताबिक रहा तो वर्ष 2020 तक हवाई यात्रा के मायने बदल जाएंगे। आपको यदि ये सुनकर हैरत हो रही है तो आपको बता दें कि यह सच है। सच इसलिए क्‍योंकि 2020 में ऐसा विमान आ जाएगा जिसके उतरने के लिए न तो रनवे की जरूरत होगी और न ही एयरपोर्ट की दरकार होगी। लिहाजा एयर ट्रेवलिंग का कंसेप्‍ट काफी कुछ बदल जाएगा। दरअसल टिल्‍ट रोटर एयरक्राफ्ट के जरिए यह सबकुछ होगा। इस तरह के पहले विमान को अमेरिका में इटली की एयरोस्‍पेस जेंट लियानार्दो हेलीकॉप्‍टर बना रही है। कंपनी का कहना है कि पहले AW609 का प्रोडेक्‍शन इसी सप्‍ताह फिलाडेलफिया में शुरू हो जाएगा। इसको फेडरल एविएशन एडमिनिस्‍ट्रेशन की तरफ से इस वर्ष के अंत तक सर्टिफिकेट भी मिल जाएगा और सब कुछ तय अनुसार चला तो 2020 तक यह विमान सेवा देनी शुरू कर देगा। कंपनी की यह पहल अपने आप में काफी दिलचस्‍प है। हालांकि शुरुआत दौर में इस विमान को इमरजेंसी सेवाओं के लिए बनाया जा रहा है, लेकिन, बाद में यह इसके दायरे से निकल सकता है।

इसको पहली बार कंपनी ने एटलांटा में हेलीकॉप्‍टर एसोसिएशन के तहत कराए जाने वाले इंटरनेशनल ट्रेड शो में पेश किया था। इस विमान में दो क्रू के साथ 11 लोगों के बैठने की सुविधा है। अब आपकी जिज्ञासा को शांत करने के लिए पहले ये बता दें कि टिल्‍ट रोटर एयरक्राफ्ट आखिर कैसा होता है। आपको बता दें कि इस तरह के विमान में हेलीकॉप्‍टर और विमान जैसी खासियत होती है जो इसके रोटर की वजह से ही होती है। इस तरह के विमान हेलीकॉप्‍टर की तरह से एक ही जगह से उड़ान भर सकता है और उतर भी सकता है। इसको वर्टिकल टेकऑफ और वर्टिकल लैंडिंग (VTOL) या शॉर्ट टेकऑफ और शॉर्ट लैंडिंग (STOL) कहा जाता है। एक बार उड़ान भरने के बाद यह विमान की तरह हो जाता है। ऐसा इसमें लगे रोटर की वजह से होता है। विंग्‍स में दोनों तरफ लगे होते हैं जो विमान को ऊपर उठाने का काम करते हैं। यह ठीक वैसे ही काम करते हैं जैसे किसी हेलीकॉप्‍टर का रोटर करता है। हवा में जाने के बाद यह धीरे धीरे सामने आ जाते हैं और विमान की दिशा में सीधे होकर उसको गति प्रदान करते हैं।

आपको यहां पर ये भी बता दें कि अमेरिका के पास पहले से ही मिलिट्री के लिए V-22 Osprey है। लेकिन, लियानार्दो कंपनी का कहना है कि उनका AW609 इससे कहीं बेहतर और इससे बिल्‍कुल अलग है। दरअसल, कंपनी ने अपने इस मॉडल में एक प्रेशराइज केबिन बनाया है जिसकी वजह से यह विमान के रूप में करीब 25 हजार फीट की ऊंचाई पर किसी भी तरह के मौसम में उड़ान भर सकता है। कंपनी इसको फिलहाल मेडिकल इमरजेंसी सुविधाओं के लिए बना रही है। 

1980 ईरान होस्‍टेज क्राइसेस के बाद अमेरिका ने बेल-बोइंग कंपनी की मदद से 1981 में यह प्रोजेक्‍ट शुरू किया था। इनके बनाए V-22 हेलीकॉप्‍टर ने पहली बार 1989 में उड़ान भरी थी। इसको अफगानिस्‍तान, लीबिया और कुवैत में भी तैनात किया गया था। अमेरिका के पास इस तरह के करीब 200 हेलीकॉप्‍टर हैं जो पूरी तरह से सेना के लिए ही हैं।

जहां तक V-22 ओस्‍प्रेय का सवाल है तो उसको 1992 और 2000 में गहरा झटका लग चुका है। इसके अलावा 2015 में भी टेस्‍ट के दौरान विमान के क्रेश होने से दो पायलट मारे गए थे। यही वजह है कि लियानार्दो अपने इस विमान को बेहतहर और सुरक्षित बनाने पर सबसे अधिक ध्‍यान दे रही है। इसी वजह से वह उन सभी मुश्किलों का भी बारिकी से आंकलन कर रही है जिसकी वजह से यह हादसे पेश आए थे।

इसका सबसे बड़ा फायदा ऑर्गन डोनेशन के मामले में होगा, जहां समय रहते ऑर्गन भेजना संभव हो जाएगा। इतना ही नहीं मरीज को समय पर अस्‍पताल ले जाना इस विमान के साथ और आसान हो जाएगा। इसके अलावा हृदय प्रत्‍यारोपण की सूरत में यह हजारों किलोमीटर दूर बैठे मरीज की मदद के लिए वरदान साबित होगा। इसके साथ ही सर्च और रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन में भी यह विमान काफी सहायक साबित हो सकेगा। हेलीकॉप्‍टर और विमान की सुविधा वाले इस AW609 को कहीं भी ऑपरेशन में लगाया जा सकेगा। इस तरह के ऑपरेश्‍न में यह ज्‍यादा तेजी के साथ और ज्‍यादा लंबी दूरी तय कर सकेगा। जहां तक इसकी कीमत का सवाल है तो आपको बता दें कि इसकी कीमत करीब 25 मिलियन डॉलर होगी। यह कीमत किसी आम हेलीकॉप्‍टर की तुलना में लगभग तीन गुणा अधिक होगी। इसकी खासियत की वजह से ही कंपनी को अमेरिका, जापान और यूएई से ऑर्डर भी मिलने शुरु हो गए हैं।

 

Posted By: Kamal Verma