वाशिंगटन, आइएएनएस। Keto diet help Alzheimer patient कम काबरेहाइड्रेट और उच्च वसा वाले आहार यानी कीटो डाइट का सेवन अल्जाइमर रोग से लड़ने में मदद कर सकता है। चूहों पर किए गए एक शोध से पता चला है कि जिस समय अल्जाइमर रोग बढ़ रहा होता है, उस दौरान इस तरह के आहार न्यूरांस (तंत्रिका कोशिकाएं) को मरने से बचाते हैं। न्यूरांस का काम मस्तिष्क से सूचना का आदान-प्रदान और विश्लेषण करना है।

न्यूरोसाइंस सोसायटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक मनुष्य के शरीर में जिस समय अल्जाइमर रोग विकसित हो रहा होता है, उस समय मस्तिष्क अति उत्तेजित होता है। चूंकि इंटरन्यूरांस (विशेष न्यूरॉन) अन्य न्यूरांस के मुकाबले मस्तिष्क को ज्यादा सिग्नल भेजते हैं, ऐसे में अन्य न्यूरांस के मुकाबले उन्हें अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यही वजह है कि जब इंटरन्यूरांस अल्जाइमर के प्रोटीन एमोलाइड बीटा के संपर्क में आते हैं तो इनके मरने की संभावना अधिक होती है।

बता दें कि अल्जाइमर भूलने की बीमारी है। डिमेंशिया की तरह अल्जाइमर्स में भी मरीज को किसी वस्तु, व्यक्ति या घटना को याद रखने में परेशानी महसूस होती है। इसके लक्षणों में याददाश्त की कमी होना, निर्णय न ले पाना, बोलने में दिक्कत आना आदि शामिल हैं। इससे पहले के अध्‍ययनों में पाया गया है कि रक्तचाप, मधुमेह, आधुनिक जीवनशैली और सिर में चोट लग जाने से इस बीमारी के होने की आशंका बढ़ जाती है। फिलहाल, 60 साल की उम्र के आसपास होने वाली इस बीमारी का कोई स्थाई इलाज नहीं है।

अल्जाइमर्स एसोसिएशन इंटरनेशनल कांफ्रेंस में हाल में पेश किए एक अन्‍य अध्ययन में कहा गया है कि पुरुषों और महिलाओं में ताउम्र प्रोटीन के फैलाव में अंतर होता है। पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं के मस्तिष्क में यह प्रोटीन ज्यादा जमा पाया गया है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि ताउ प्रोटीन ब्रेन टिश्यू के जरिये किसी संक्रमण की तरह फैलता है। यह प्रोटीन एक तंत्रिका कोशिका से दूसरे में पहुंचता है। नतीजन दूसरे प्रोटीन भी असामान्य हो जाते हैं और मस्तिष्क कोशिकाएं खत्म होने लगती हैं।

Posted By: Krishna Bihari Singh

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