वॉशिंगटन, प्रेट्र। इंटरनेट पर सर्वाधिक लोकप्रिय सर्च इंजनों में से एक गूगल मैप्स ने एक अजीब करामात की है। यह देशों की सीमाएं जगह के हिसाब से बदलकर दिखाता है। अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि भारत के बाहर से देखने पर यह कश्मीर की सीमा (आउटलाइन) को 'डॉटेड लाइन' के रूप में 'विवादित' बताता है। अखबार के मुताबिक, पाकिस्तान से देखने पर कश्मीर विवादित दिखता है, जबकि भारत से देखने पर यह भारत का हिस्सा दिखता है। इस तरह गूगल मैप्स कश्मीर की सीमा को इस आधार पर बदल देता है कि आप सर्च किस देश में कर रहे हैं।

वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अर्जेंटीना से लेकर यूके और ईरान तक दुनिया की सीमा अलग-अलग दिखती है, जो इस बात पर निर्भर करती है कि आप उसे कहां से देखते हैं। ऐसा इसलिए कि गूगल और अन्य ऑनलाइन मैपमेकर्स उन्हें बदल देते हैं। अखबार का यह भी कहना है कि गूगल का कॉरपोरेट मिशन तो दुनिया भर की सूचनाओं को व्यवस्थित करना है, लेकिन यह अपनी इच्छा से तोड़-मरोड़ भी देता है। चूंकि गूगल मैप्स की मोबाइल मैप्स बाजार में 80 फीसद भागीदारी है और एक अरब से ज्यादा यूजर्स हैं, इसलिए दुनिया भर में लोगों की धारणा पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कैलिफोर्निया स्थित मुख्यालय वाली इस कंपनी में मैप्स पर फैसले लेने वाले गोपनीयता बरतते हैं, यहां तक कि वैसे लोगों से भी जो हर दिन डिजिटल एटलस को आकार देते हैं। अखबार ने इस मामले से जुड़े कुछ अनाम लोगों के हवाले से कहा है कि यह न सिर्फ इतिहास और स्थानीय कानूनों को प्रभावित करता है, बल्कि राजनयिकों, नीति निर्माताओं तथा अपने अधिकारियों पर भी असर डालता है। पंद्रह साल पहले लांच किया गया गूगल मैप्स सर्च इंजन के सर्वाधिक उपयोग में आने वाले उत्पादों में से एक है।

कंपनी प्रवक्ता की सफाई

अखबार की रिपोर्ट पर कंपनी प्रवक्ता ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि विवादित क्षेत्र को दर्शाने की गूगल की सुसंगत और वैश्रि्वक नीति है तथा वैश्रि्वक डोमेन पर विवादित या देशों के दावों को दर्शाने के लिए काफी सुविधाएं हैं। यह किसी एक पक्ष के दावे का न तो समर्थन करता है और न पुष्टि करता है। उन्होंने कहा, 'हम अपने यूजर्स को यथासंभव समृद्ध, अद्यतन तथा सटीक मैप्स उपलब्ध कराने को प्रतिबद्ध हैं। हम सीमाओं को हमारे डाटा प्रदाताओं द्वारा उपलब्ध कराए गए नए डाटा या आधिकारिक सूत्रों से मिले डाटा या भौगोलिक स्थितियों में बदलाव के आधार पर अपडेट करते हैं- जैसा कि 2014 में

Posted By: Shashank Pandey

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