हिंदू होने की वजह से ट्रंप के हमलावर की लिस्ट में नहीं थे काश पटेल? रिपोर्ट में खुलासा
व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर से पहले कोल एलन ने एक घोषणापत्र जारी किया था, जिसमें उसने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और अन्य अधिकारियों को निशाना बनाने की बात कही थी।
HighLights
कोल एलन ने ट्रंप को निशाना बनाने का घोषणापत्र जारी किया था
FBI निदेशक काश पटेल का नाम सूची से बाहर रखा गया था
जांच एजेंसियां कारण तलाश रही हैं, हिंदू धर्म या अन्य वजह
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका के व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर में हुई गोलीबारी से पहले आरोपी कोल टॉमस एलन ने एक घोषणापत्र जारी किया था। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और उनके अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को निशाना बनाने की बात कही गई थी। वहीं, इसमें FBI निदेशक काश पटेल का नाम अलग रखा गया था।
न्यूयॉर्क पोस्ट की माने तो अब जांच एजेंसी इस बात की जांच में जुट गए है कि, आखिर ऐसा क्यों किया गया था। सूत्रों की माने तो आरोपी एलन पर ईसाई विरोधी व्यक्ति होने का आरोप है, और काश पटेल हिंदू है। इसीलिए उनका नाम अलग रखा गया था। हालांकि इस बात की पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
जांच एजेंसियों से दूर रहना चाहता था आरोपी
सूत्रों ने आगे बताया कि, पटेल को विशेष रूप से अलग रखने का एक अन्य कारण यह था कि, एलन इन जांच एजेंसियों को निशाना बनाने से बचना चाहता था, और अपना पूरा ध्यान सिर्फ ट्रंप पर केंद्रित करना चाहता था। जिनके खिलाफ उसने अपने घोषणापत्र में जमकर भड़ास निकाली थी।

घोषणापत्र में क्या कहा गया था?
अधिकारियों ने बताया कि हमला करने से कुछ ही समय पहले, एलन ने अपने परिवार के सदस्यों से माफी मांगी थी। अपने संदेश में एलन ने लिखा था, "मैंने जो भी परेशानियां खड़ी की हैं, उनके लिए मैं दिल से माफी मांगता हूं, और साथ ही यह भी जोड़ा कि वह जो कुछ करने जा रहा है, उसके लिए उसे किसी भी तरह की माफी मिलने की उम्मीद नहीं है।"
इसके बाद, उसने अपने घोषणापत्र में लिखा कि, "मेरे प्रतिनिधि जो कुछ भी करते हैं, उसका असर मुझ पर पड़ता है। और अब मैं... ऐसे अपराधों को और अधिक बर्दाश्त करने के लिए तैयार नहीं हूं।" जांचकर्ताओं ने बताया कि घोषणापत्र से यह स्पष्ट हो गया था कि, एलन का इरादा उस डिनर में शामिल होने वाले शीर्ष सरकारी अधिकारियों को निशाना बनाने का था।
वही, 1,052 शब्दों वाले उस दस्तावेज में कहा गया था, "प्रशासनिक अधिकारी (पटेल को छोड़कर) यही मेरे निशाने पर हैं; जिन्हें ऊपर से लेकर नीचे पद तक क्रम में प्राथमिकता दी गई है।"
इस मैनिफेस्टो में एलन ने कुछ ऐसी बातें भी लिखी थीं, जिन्हें उसने नियम बताया था। इन नियमों के अनुसार, सीक्रेट सर्विस के लोगों को तभी निशाना बनाया जाएगा जब ऐसा करना बहुत जरूरी हो, और होटल के स्टाफ या मेहमानों जैसे दूसरे लोगों को मुख्य रूप से निशाना नहीं बनाया जाएगा।
आरोपी जांच में नहीं कर रहा सहयोग
कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने बताया कि, यह मैनिफेस्टो, हमलावर के मकसद की जांच के लिए एक अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा, "जहां तक हमें उसके मकसद के बारे में और ज्यादा जानकारी मिलने की बात है... तो यह काम FBI और कानून लागू करने वाली एजेंसियों का है।"
उन्होंने यह भी बताया कि एलन, जिस पर अब राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की हत्या की कोशिश करने का आरोप है, गिरफ्तार होने के बाद से कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ सहयोग नहीं कर रहा है। बता दें कि, 31 साल के एलन को सोमवार को पहली बार संघीय अदालत में पेश किया गया। इस दौरान उसका रवैया काफी अड़ियल था। अगर उस पर लगे आरोप साबित हो जाते हैं, तो उसे उम्रकैद की सजा हो सकती है।
