मिडटर्म चुनावों के बाद ट्रंप से दूरी बना रहे उपराष्ट्रपति, जेडी वेंस ने बदली राजनीतिक रणनीति; क्या शुरू की 2028 की तैयारी?
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद जेडी वेंस ने अपनी राजनीतिक रणनीति बदली है, जो उन्हें डोनाल्ड ट्रंप से अलग पहचान ...और पढ़ें

जेडी वेंस ने बदली राजनीतिक रणनीति

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को लगे झटके के बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अपनी राजनीतिक रणनीति बदलनी शुरू कर दी है। वर्ष 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में पार्टी का चेहरा बनने की संभावनाओं के बीच वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की छाया से निकलकर अपनी अलग पहचान बनाने में जुट गए हैं।
ईरान युद्ध से लेकर अवैध अप्रवासियों के निर्वासन तक, वेंस ने कई मुद्दों पर ट्रंप से अलग रुख अपनाने के संकेत दिए हैं।
चुनाव प्रचार के दौरान भी वेंस ने ट्रंप के बचाव के बजाय आर्थिक राष्ट्रवाद, विदेश नीति और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी। ट्रंप जहां मागा (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) आंदोलन के एजेंडे को आगे बढ़ाते रहे, वहीं वेंस ने आम अमेरिकियों की आर्थिक चिंताओं और सुरक्षा को अपनी राजनीति का आधार बनाने की कोशिश की। हालांकि, वेंस ने अभी 2028 का राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की घोषणा नहीं की है।
ट्रंप ने भी उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया है। लेकिन चुनाव नतीजों के बाद वेंस की टिप्पणियों ने उनकी महत्वाकांक्षाओं को लेकर अटकलें तेज कर दी हैं।
उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी की हार के लिए ईरान युद्ध को बड़ी वजह बताते हुए संघर्ष जल्द खत्म करने की पैरवी की। साथ ही पार्टी को महंगाई और आम लोगों की आर्थिक परेशानियों पर ध्यान देने, विदेश नीति की प्राथमिकताओं पर फिर से विचार करने और इजरायल के साथ अमेरिका के रिश्तों में बड़े बदलाव की जरूरत बताई।
वेंस का यह रुख ट्रंप की नीतियों से अलग दिखाई देता है। ट्रंप ने जहां आम लोगों की किफायती वस्तुओं से जुड़ी चिंताओं को डेमोक्रेट्स का धोखा बताया, वहीं इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लगातार दबाव के बीच ईरान के खिलाफ युद्ध का रास्ता चुना। उन्होंने इजरायल के चुनाव में भी नेतन्याहू का समर्थन किया।
दूसरी ओर, वेंस अब युद्ध खत्म करने और अमेरिकी हितों को प्राथमिकता देने की बात कर रहे हैं।
पीटीआई के अनुसार, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जान बोल्टन ने वेंस की टिप्पणियों को 2028 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन अभियान की शुरुआत बताया है। उनके मुताबिक, अर्थव्यवस्था, बढ़ती कीमतों और ट्रंप की टैरिफ नीतियों को लेकर मतदाताओं की नाराजगी को स्वीकार करना वेंस का सोचा-समझा राजनीतिक कदम है, लेकिन इसमें जोखिम भी कम नहीं है।
भारत पर भी पड़ सकता है असरबोल्टन ने कहा कि वाशिंगटन में घरेलू राजनीति की उथल-पुथल के कारण विदेश नीति की प्राथमिकताएं पीछे छूट सकती हैं। इसका असर भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा सुरक्षा चुनौतियों पर होने वाली बातचीत पर भी पड़ सकता है।
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