शेयर बाजारों में कोहराम: ईरान युद्ध के चलते आर्थिक मोर्चे पर यूरोप से एशिया तक खलबली, कई देशों का बजट बिगड़ा
पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध के लंबे समय तक चलने की आशंका के चलते दुनियाभर की सरकारों में आर्थिक मोर्चे ...और पढ़ें

ईरान युद्ध के चलते आर्थिक मोर्चे पर यूरोप से एशिया तक खलबली (फोटो- रॉयटर)
HighLights
बढ़ती ऊर्जा लागत और ईंधन की कमी से बढ़ रहीं चुनौतियां
यूरोपीय, एशियाई देशों की आयातित तेल पर निर्भरता ज्यादा
न्यूयॉर्क टाइम्स, न्यूयॉर्क। पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध के लंबे समय तक चलने की आशंका के चलते दुनियाभर की सरकारों में आर्थिक मोर्चे पर खलबली है। यह स्थिति यूरोप से लेकर एशिया तक है। उनके समक्ष बढ़ती ऊर्जा लागत और ईंधन की कमी समेत तमाम चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं।
इस समय कोई भी देश इस समस्या से अछूता नहीं है, लेकिन विशेष रूप से यूरोप और एशिया के देशों में गंभीर स्थिति है। इन देशों की आयातित तेल और गैस पर निर्भरता अधिक है।
जबकि महंगाई आर्थिक और राजनीतिक चिंता का विषय है। हालांकि पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद कुछ देशों ने नागरिकों को राहत देने के लिए कदम उठाए हैं।
पुर्तगाल ने डीजल पर करों में कटौती की है। ग्रीस ने ईंधन और कुछ किराने के सामान की बिक्री पर लाभ की सीमा तय की है। दक्षिण कोरिया में घरेलू ऊर्जा वाउचर कार्यक्रम शुरू करने पर विचार किया जा रहा है।
रिसर्च ग्रुप ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के मुख्य यूरोपीय अर्थशास्त्री एंजेल तलवेरा ने कहा, वित्तीय स्थिति महत्वपूर्ण है, लेकिन राजनीतिक दबाव एक बहुत बड़ा कारक है। बढ़ती कीमतें मतदाताओं के लिए विवादास्पद मुद्दा बन गई हैं।
इधर, युद्ध में ईरान की तरफ से कतर और सऊदी अरब के प्रमुख ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाए जाने से वैश्विक ऊर्जा प्रवाह में व्यवधान कम होने के कोई संकेत नहीं हैं। जबकि युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट पहले से बंद है। वैश्विक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।
