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खतरे को दावत! AI से यूजर्स ने मांगी कुछ जानकारी, उसने वेबसाइट में ही लगा दी सेंध

Published: Sun, 27 Sep 2026 03:57 PM (IST)

ओपनएआई के एआई एजेंट्स ने यूजर्स के सवालों के जवाब ढूंढते हुए अमेरिकी सरकारी वेबसाइटों में सेंध लगाई और डेटा निकालने की कोशिश की।

ओपनएआई ने वेबसाइटों में की सेंधमारी।

ओपनएआई ने वेबसाइटों में की सेंधमारी।

HighLights

  1. ओपनएआई के एआई एजेंट्स ने अमेरिकी सरकारी वेबसाइटें हैक कीं।

  2. शिक्षा, वाणिज्य विभाग और एसईसी की वेबसाइटों से डेटा निकाला।

  3. एआई सुरक्षा पर गंभीर चिंताएं बढ़ीं, डेटा लीक के मामले सामने।

डिजिटल डेस्क, न्यूयॉर्क। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) दिन-ब-दिन कितना खतरनाक होता जा रहा है, उसका ताजा उदाहरण देखने को मिला है। दरअसल, एआई यजूर्स ने उससे कुछ जानकारी मांगी तो उसने वेबसाइट में सेंध लगा दी।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ओपनएआई के एजेंट्स (खुद काम करने वाले बॉट्स) ने पहली बार अमेरिका के सरकारी विभाग की सिक्योरिटी सीमाएं लांघी हैं। यूजर्स के सवालों के जवाब खोजते हुए बॉट्स ने अमेरिकी सरकारी वेबसाइटों से डेटा निकालने की कोशिश की। कंपनी को इसकी जानकारी भी नहीं थी।

वेबसाइट से डेटा लेकर ऑनलाइन फोरम पर किया शेयर

एआई एजेंट्स ने शिक्षा विभाग, कॉमर्स डिपार्टमेंट और शेयर बाजार की रेगुलेटर संस्था (एसईसी) की वेबसाइटों से डेटा निकाला। शिक्षा विभाग की सिविल राइट्स ऑफिस वेबसाइट को हैक करने की कोशिश हुई। हालांकि, इसमें सफलता नहीं मिली। कॉमर्स डिपार्टमेंट की सेंसस ब्यूरो वेबसाइट से ऑनलाइन मिले लॉगिन आईडी-पासवर्ड का इस्तेमाल किया गया। एसईसी की वेबसाइट से पब्लिक डेटा लेकर ऑनलाइन फोरम पर शेयर किया गया।

ओपनएआई के मुताबिक, ज्यादातर गतिविधियां सामान्य रिसर्च के दौरान हुईं। कुछ मामलों में एआई ने सरकारी वेबसाइटों को पब्लिक जानकारी का भरोसेमंद सोर्स माना। कंपनी ने संबंधित एजेंसियों को जानकारी दे दी है।

ओपनएआई से जुड़े ज्यादा मामले सामने आए

इस खुलासे के बाद ऐसे केसों पर चर्चा बढ़ी है, जिनमें एआई एजेंट्स ने कंपनियों, यूनिवर्सिटीज और सरकारी संस्थानों में सेंध लगाने की कोशिश की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओपनएआई से जुड़े ऐसे मामले जितने सामने आए हैं, उतने किसी और एआई कंपनी से नहीं आए।

'हगिंग फेस' से जुड़े एक केस की अंदरूनी जांच में ऑस्ट्रेलिया की पब्लिक हेल्थ सिस्टम वाली सरकारी वेबसाइट पर भी इसी तरह की सेंधमारी का जिक्र हुआ। इसके अलावा कम से कम 6 अन्य मामलों में एआई पर गलतियों को छिपाने, डेटा खुद से गढ़ने और बिना अनुमति इंटरनेट पर फाइलें अपलोड करने जैसे आरोप भी सामने आए हैं।

नेवी और व्हाइट हाउस की साइट्स भी खंगालीं

एआई फर्म ट्रांसलूस के अधिकारी कॉनराड स्टोस्ज के अनुसार, ओपनएआई के एजेंट्स ने नियमों का उल्लंघन कर अमेरिकी नौसेना और व्हाइट हाउस के बजट दफ्तर सहित कई सरकारी साइटों की जानकारी जुटाई। हालांकि ऐसे कुछ मामलों को सीधे कंपनी से जोड़ना मुश्किल है।

एक अन्य मामले में एआई कंपनी ओपनएआई ने स्वीकार किया है कि उसके एआई एजेंट्स ने चैटजीपीटी यूजर्स की 53 तस्वीरें लीक कर दीं। कंपनी ने यह साफ नहीं किया कि ये तस्वीरें एआई से बनी थीं या असली लोगों की थीं। यह भी नहीं बताया कि इन्हें कब पोस्ट किया गया।

खतरे को दावत

ऑल्टमैन ने कहा था कि एआई की क्षमता बढ़ाने से ज्यादा जरूरी उसकी सुरक्षा है। एंथ्रोपिक सीईओ डारियो अमोडेई ने एआई विकास की रफ्तार धीमी करने का समर्थन किया है। वहीं, राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप एआई की रफ्तार धीमी करने के पक्ष में नहीं हैं।

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