अमेरिका में भारतीय IT कंपनियों के ग्रीन कार्ड आवेदनों में भारी गिरावट, H-1B वीजा पर घटी निर्भरता
अमेरिका ने भारतीय आईटी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (पर्म) कार्यक्रम से निलंबित किया है, लेकिन आंकड़ों के अनुसार निलंबन ...और पढ़ें
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अमेरिका में ग्रीन कार्ड आवेदनों में भारी गिरावट (सांकेतिक तस्वीर)
HighLights
अमेरिकी पर्म कार्यक्रम से 8 आईटी कंपनियां निलंबित हुईं।
निलंबन से पहले ही ग्रीन कार्ड आवेदनों में गिरावट आई।
भारतीय आईटी कंपनियों की H-1B निर्भरता घटी।
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिका में भारतीय आईटी कंपनियों के ग्रीन कार्ड आवेदनों में भारी गिरावट आई है। ऐसे में परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (पर्म) कार्यक्रम से आठ कंपनियों को निलंबित करने के अमेरिकी फैसले का उनके कामकाज पर तत्काल असर सीमित रहने की संभावना है।
आंकड़े बताते हैं कि कई कंपनियों ने निलंबन से पहले ही इस प्रक्रिया के तहत आवेदन काफी घटा दिए थे।
अमेरिका ने गुरुवार को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएल समेत आठ कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित किया था। इस सूची में कैपजेमिनी, काग्निजेंट, माइक्रोसाफ्ट और एडोब भी शामिल हैं।
अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इस व्यवस्था के जरिये विदेशी कर्मचारियों को स्थायी निवास दिलाने से अमेरिकी कामगारों के अवसर प्रभावित होते हैं।
स्थायी श्रम प्रमाणन (पर्म) के आंकड़ों के अनुसार, टीसीएस ने अमेरिकी वित्त वर्ष 2024 में 1,804 और 2025 में 513 आवेदन किए थे। 2026 में यह संख्या घटकर सिर्फ दो रह गई। एचसीएल ने 2025 में 323 आवेदन किए थे, जबकि 2026 में 59 आवेदन दर्ज हुए।
विप्रो ने 2024 में 257 और 2025 में 523 आवेदन किए। वहीं, इन्फोसिस ने 2024 में 87 आवेदन किए थे। इन कंपनियों के सभी वर्षों के तुलनीय आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए इनके रुझान की पूरी तुलना संभव नहीं है।कैपजेमिनी ने 2024 में 300 और 2025 में 361 आवेदन किए, जो 2026 में घटकर 98 रह गए।
काग्निजेंट ने 2024 में 1,236 आवेदन किए थे, लेकिन 2025 और 2026 के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।एचसीएल टेक्नोलाजीज के पूर्व सीईओ विनीत नायर ने एक्स पर लिखा कि पिछले साल भारतीय आईटी कंपनियों ने कुल 1,17,849 पर्म प्रमाणनों में से 1,400 से भी कम हासिल किए।
उनके अनुसार, यह दो प्रतिशत से भी कम है, इसलिए निलंबन का सीधा असर सीमित हो सकता है।नैसकाम और टीसीएस ने भी कहा है कि पर्म आवेदनों में पहले से गिरावट आ रही है।
टीसीएस के मुताबिक, उसके आवेदन पिछले दो वर्षों में एकल अंक में रहे हैं, इसलिए निलंबन से उसकी कार्यबल रणनीति और ग्राहक संबंधों पर असर पड़ने की आशंका नहीं है। नैसकाम का कहना है कि भारतीय आईटी कंपनियों ने एच-1बी वीजा पर निर्भरता घटाई है और अमेरिका में स्थानीय भर्ती बढ़ाई है। (समाचार एजेंसी PTI के इनपुट के साथ)
