वॉशिंगटन, पीटीआइ। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले से अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया है। साथ ही शीर्ष अदालत ने विवादित ढांचे को गिराने को गैरकानूनी बताते हुए मुस्लिमों को भी मस्जिद के लिए अयोध्या में ही पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के इस संतुलित फैसले का देश में ही नहीं विदेश में भी सराहना की जा रही है। अमेरिका में रहने वाले भारतीयों ने इसे हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों के लिए जीत बताया है। अमेरिका की भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर थी। फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य दलों के नेताओं के बयानों को भी उसने गंभीरता से सुना। अमेरिका के विदेश विभाग ने प्रधानमंत्री और अन्य नेताओं के बयानों की सराहना की, जिसमें सभी वर्गो से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की गई थी।

वहीं, हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (एचएएफ) ने एक बयान में फैसले को हिंदुओं के साथ ही मुस्लिमों की भी जीत बताया। फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डाइएस्पर स्टडीज (एफआइआइडीएस) ने फैसले को संतुलित बताया। संगठन ने कहा कि यह फैसला आगे के अन्य विवादों के लिए न सिर्फ एक नजीर पेश करता है, बल्कि भारतीय न्यायिक प्रणाली की परिपक्वता को भी दर्शाता है। संगठन ने राम मंदिर जैसे संवेदनशील मसले पर संतुलित और ऐतिहासिक फैसला देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का आभार भी जताया है।

एफआइआइडीएस ने देश में शांति और सौहार्द बनाए रखने में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और सामाजिक-राजनीतिक संगठनों के साथ ही विभिन्न समुदाय के नेताओं के प्रयासों की भी सराहना की।

वहीं, विश्व हिंदू परिषद के विचारों से प्रभावित अमेरिकी संगठन व‌र्ल्ड हिंदू काउंसिल फॉर अमेरिका (वीएचपीए) ने भी फैसले की सराहना की है। संगठन ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन दुनिया भर में फैले हिंदुओं के लिए वर्षो की दासता, क्रूरता और त्रासदी के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक था।

 

Posted By: Manish Pandey

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