वॉशिंगटन, एएनआइ। भारतीय-अमेरिकी हिंदू संगठनों ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के हालात पर सुनवाई से पहले टॉम लैंटोस मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखा। जिसमें आयोग से आग्रह किया कि वह क्षेत्र में भारत के सामने मौजूद अद्वितीय सुरक्षा चुनौतियों को पहचानने के साथ ही अनुच्छेद 370 को हटाए जाने की आवश्यकता को बताए।

लिखित बयान में कही गई ये बात

हिन्दू अमेरिकन फ़ाउंडेशन (HAF), इंडो-अमेरिकन कश्मीर फ़ोरम (IAKF), कश्मीर हिंदू फ़ाउंडेशन (KHF) द्वारा 14 नवंबर के लिखित बयान के अनुसार ये पत्र जम्मू और कश्मीर में सीमा पार से आतंकवाद और चरमपंथ द्वारा उत्पन्न खतरे को उजागर करने वाले तथ्यों का विवरण प्रदान करता है। साथ ही पूछा गया कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के निर्णय से देश को इन चुनौतियों से निपटने में कैसे मदद मिलेगी।

बयान में कहा गया है कि मानव अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता पर कोई बड़ा खतरा नहीं है। लेकिन, आतंकवाद और कट्टरपंथी उग्रवाद खतरा है। ऐसे में लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकारें और विधायिका, स्वतंत्र न्यायिक संस्थाएं और नागरिक समाज समूह अपने नागरिकों के खिलाफ हिंसा और हत्या के लगातार खतरों का सामना करने के लिए कार्य नहीं कर सकते।

दिखाई गई निराशा

48 घंटे की एक छोटी सार्वजनिक सूचना पर सुनवाई का आयोजन करने वाले आयोग पर निराशा व्यक्त करते हुए बयान शुरू हुआ, यह देखते हुए कि दो सप्ताह या उससे अधिक के पारंपरिक अग्रिम नोटिस ने संभावित विशेषज्ञ गवाहों, गैर-सरकारी संगठनों से बहुत व्यापक प्रतिक्रिया प्राप्त की है। वह इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इसमें 1989-1990 में कश्मीर घाटी से 350,000 से अधिक कश्मीरी पंडितों की जातीय सफाई पर प्रकाश डाला गया।

बयान में आयोग से जम्मू-कश्मीर में भारत द्वारा सामना की जा रही अनूठी सुरक्षा चुनौतियों को पहचानने और पाकिस्तान की भूमिका को आतंक के राज्य प्रायोजक के रूप में संबोधित करने का आग्रह किया गया। गौरतलब है कि जम्मू और कश्मीर में मानवाधिकार की स्थिति पर सुनवाई कल वाशिंगटन में कैपिटल हिल में आयोजित की गई थी।

Posted By: Ayushi Tyagi

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