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'वीटो का इस्तेमाल संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं होना चाहिए', UN में भारत की दो टूक

Published: Tue, 27 Oct 2026 09:30 AM (IST)

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधारों की मांग दोहराई है, जिसमें वीटो पावर का उपयोग संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ के लिए न करने पर जोर दिया गया है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्थवनेनी हरीश(फोटो: स्क्रीनग्रैब)

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्थवनेनी हरीश(फोटो: स्क्रीनग्रैब)

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डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में व्यापक सुधारों की अपनी मांग को एक बार फिर दोहराते हुए भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। भारत ने स्पष्ट कहा कि सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों (पी5) को मिला वीटो पावर का विशेषाधिकार किसी संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ को साधने का साधन नहीं बनना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्थवनेनी हरीश ने देश का पक्ष रखते हुए कहा कि वीटो केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि एक भारी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े मसलों पर वीटो का इस्तेमाल बेहद संयम के साथ किया जाना चाहिए।

वीटो के अंधाधुंध इस्तेमाल से सुरक्षा परिषद की साख को नुकसान

भारतीय राजदूत ने वीटो के ऐतिहासिक इस्तेमाल का ब्योरा देते हुए बताया कि कुछ चुनिंदा देशों द्वारा इसके असंतुलित उपयोग ने सुरक्षा परिषद की विश्वसनीयता को चोट पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में लगभग 200 प्रस्तावों पर अब तक 331 बार वीटो का उपयोग किया जा चुका है।

पिछले साढ़े तीन दशकों से पांच स्थायी सदस्यों में से दो ने वीटो का इस्तेमाल नहीं किया है, जबकि अधिकांश वीटो या उसकी धमकियां बाकी तीन सदस्यों की तरफ से ही आई हैं।

2022 में वीटो के इस्तेमाल पर जवाबदेही तय करने के लिए नियम बनाए गए थे, लेकिन उसके बाद भी इसके लगातार उपयोग से साबित होता है कि वे प्रयास नाकाफी रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र में भारत की व्यापक सुधारों की मांग

पार्थवनेनी हरीश ने रेखांकित किया कि वीटो के मुद्दे को अकेले सुलझाने से व्यवस्था नहीं बदलेगी। इसके लिए सुधार के सभी महत्वपूर्ण विषयों पर एक साथ बात करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए तुरंत एक आधिकारिक मसौदे पर आधारित बातचीत शुरू की जानी चाहिए, जिसकी तय समयसीमा हो। सदस्यता की श्रेणियां, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, परिषद का आकार और कार्यप्रणाली जैसे सभी पांच मुख्य सुधार स्तंभों पर एक साथ कदम आगे बढ़ाने की जरूरत है।

छिपे हुए वीटो पर भी भारत ने उठाया सवाल

भारतीय प्रतिनिधि ने सुरक्षा परिषद के भीतर पर्दे के पीछे चलने वाली रुकावटों की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि वीटो केवल वही नहीं है जो खुले तौर पर डाला जाता है। परिषद के भीतर एक अघोषित या प्रभावी वीटो भी काम करता है।

अध्यक्षीय बयानों, प्रेस विज्ञप्तियों और प्रतिबंध समितियों के फैसलों में आम सहमति का अलिखित नियम लागू होता है, जहां कोई भी एक देश बिना कोई स्पष्ट कारण बताए किसी भी प्रस्ताव पर रोक लगा देता है।

सभी स्थायी सदस्यों को मिले समान अधिकार

अफ्रीकी देशों के साझा रुख यानी कॉमन अफ्रीकन पोजिशन का समर्थन करते हुए भारत ने कहा कि विस्तारित सुरक्षा परिषद में न्याय और निष्पक्षता तभी संभव है जब सभी स्थायी सदस्यों को समान अधिकार और जिम्मेदारियां मिलें।

राजदूत ने स्पष्ट किया कि जब तक वीटो की व्यवस्था मौजूद है, तब तक परिषद के सभी नए और पुराने स्थायी सदस्यों को यह अधिकार मिलना चाहिए। बिना वीटो वाली दोयम दर्जे की स्थायी सदस्यता की श्रेणियां बनाने से असमानता और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि न्याय की मांग यही है कि सुधारों के जरिए पुराने असंतुलन को हमेशा के लिए दूर किया जाए।

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