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यूएन शिखर सम्‍मेलन में ई कचरा कलेक्‍शन की स्‍टोरी सुनाएगी दक्षायनी, जमशेदपुर की 12 साल की बेटी को मिला न्‍योता

By Ch Rao Edited By: Sanjeev Kumar
Published: Sun, 25 Oct 2026 06:11 AM (IST)

जमशेदपुर की 12 वर्षीय छात्रा दक्षायनी ने ई-कचरा संग्रहण अभियान चलाकर देश के टॉप-50 चेंजमेकर्स में स्थान पाया है। वह ...और पढ़ें

जमशेदपुर के गोलमुरी स्थित केरला समाजम माडल स्कूल की कक्षा सात की छात्रा वाई. दक्षायनी अपने माता-पिता के साथ।

जमशेदपुर के गोलमुरी स्थित केरला समाजम माडल स्कूल की कक्षा सात की छात्रा वाई. दक्षायनी अपने माता-पिता के साथ।

HighLights

  1. देश के टॉप-50 चेंजमेकर्स में अपनी जगह बनाई।

  2. संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।

वेंकटेश्वर राव, जमशेदपुर । उम्र महज 12 साल, लेकिन सोच और जज्बा ऐसा कि आज पूरा शहर और झारखंड राज्य गौरवान्वित महसूस कर रहा है। 
 
जमशेदपुर के गोलमुरी स्थित केरल समाजम मॉडल स्कूल (KSMS) की कक्षा सात की मेधावी छात्रा वाई. दक्षायनी ने ई-कचरा संग्रहण का अनूठा अभियान चलाकर अपनी एक अलग अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है। 
 

देश के टॉप-50 चेंजमेकर्स में बनाई जगह 

चेंजमेकर वर्ल्ड कप-2026 में देशभर से आई 10 हजार से अधिक प्रविष्टियों को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने देश के टॉप-50 चेंजमेकर्स में अपनी जगह बनाई है। 
 
खास बात यह है कि झारखंड से यह प्रतिष्ठित उपलब्धि हासिल करने वाली वह इकलौती छात्रा हैं। अब दक्षायनी आगामी 19 और 20 नवंबर को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित होने वाले संयुक्त राष्ट्र (UN) शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी, जहां वह दुनिया के सामने अपने विचार साझा करेंगी। 
 

अटल इनोवेशन मिशन के तहत हुई प्रतियोगिता  

इस प्रतियोगिता का आयोजन वन मिलियन फॉर वन बिलियन द्वारा अटल इनोवेशन मिशन के तहत 18 वर्ष से कम आयु के विद्यार्थियों के लिए किया गया था।
 
चेंजमेकर वर्ल्ड कप-2026 के लिए दक्षायनी ने जुलाई माह में ई-कचरा प्रबंधन से जुड़ा अपना अभिनव आइडिया ऑनलाइन प्रस्तुत किया था। 
 
मिशन-टू के तहत 69 प्रतिभागियों के बीच चयन होने के बाद उन्हें अपने इस विचार को धरातल पर उतारना था और महज 10 दिनों के भीतर इसे पूरा करना था।
 

स्थानीय दुकानों पर ई-कचरा संग्रह बॉक्स लगवाए 

दक्षायनी ने 25 अगस्त से घर-घर जाकर ई-कचरा जुटाने के अभियान की शुरुआत की। जब अभियान को शुरुआती दौर में अपेक्षित गति नहीं मिली, तो उन्होंने सूझबूझ दिखाते हुए बारीडीह और बागुनहातू की तीन स्थानीय दुकानों पर ई-कचरा संग्रह बॉक्स (कलेक्शन बॉक्स) लगवाए और जागरूकता पोस्टर चस्पा किए। 
 
उनकी यह मेहनत रंग लाई, पहले दिन जहां बॉक्स खाली था, वहीं पांचवें दिन आधा भर गया और 10वें दिन तक कुल 99 किलोग्राम ई-कचरा सफलतापूर्वक एकत्र हो गया। 
 
इस सारे कचरे को सुरक्षित रीसाइक्लिंग (पुनर्चक्रण) के लिए हुल्लाडेक संस्था को सौंप दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया का एक प्रेरणादायक वीडियो बनाकर प्रतियोगिता के लिए भेजा गया था, जिसके आधार पर उनका चयन टॉप-50 में हुआ।
 
दक्षायनी का पर्यावरण के प्रति प्रेम कोई नया नहीं है। वह कक्षा तीन से ही बेकार सामग्री (वेस्ट मटेरियल) से खूबसूरत और उपयोगी वस्तुएं बनाती आ रही हैं। 
 

पक्षियों के लिए सुंदर घर व फीडर भी तैयार किए 

इस अभियान के दौरान उन्होंने सीड बॉल्स (बीज की गोलियां), इको-ब्रिक्स और पक्षियों के लिए सुंदर घर व फीडर भी तैयार किए। पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपने इन प्रयासों को वह अपने यूट्यूब चैनल ग्रीन हसल के माध्यम से लोगों के साथ साझा करती हैं। 
 
दक्षायनी का मानना है कि ई-कचरे में मौजूद छोटी-सी बैटरी भी पानी और मिट्टी को भारी नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए इसका सुरक्षित और अलग संग्रहण बहुत जरूरी है।
 

साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं दक्षायनी

दक्षायनी के पिता वाई. रामदेव एक छोटे दुकानदार हैं और माता वाई. सत्यावती गृहणी हैं। उनका पूरा परिवार बागुनहातू में रहता है। 
 
उनकी इस उपलब्धि पर स्कूल की प्राचार्या रीना बनर्जी ने गर्व जताते हुए कहा कि दक्षायनी की रचनात्मकता और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बचपन से ही सराहनीय रही है।
 
वहीं, स्कूल के चेयरमैन सुकुमारन ने कहा कि विद्यालय उनकी जिनेवा यात्रा के लिए हरसंभव सहयोग कर रहा है।