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अमेरिका में मिड-टर्म इलेक्शन में भारतीय भाषाओं में मतदान की सुविधा हर जगह उपलब्ध नहीं

Published: Mon, 26 Oct 2026 12:03 AM (IST)

अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं की बढ़ती संख्या के बावजूद, भारतीय भाषाओं में मतदान की सुविधाएं देशभर में असमान हैं।

अमेरिका में मिड-टर्म चुनावों के लिए भारतीय भाषाओं में मतदान की सुविधाएं कुछ जगह पर नहीं

अमेरिका में मिड-टर्म चुनावों के लिए भारतीय भाषाओं में मतदान की सुविधाएं कुछ जगह पर नहीं

HighLights

  1. अमेरिका में भारतीय भाषाओं में मतदान सुविधाएं असमान हैं।

  2. टेक्सस जैसे राज्यों में भारतीय भाषा विकल्प उपलब्ध नहीं।

  3. संघीय कानूनों के बावजूद अनुवादित मतपत्रों का भारी अभाव।

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद देश भर में भारतीय भाषाओं में मतपत्रों और सुविधाओं की उपलब्धता बेहद असमान है।

देश भर के चुनाव कार्यालयों की समीक्षा से पता चला है कि शिकागो में रहने वाला एक भारतीय-अमेरिकी मतदाता तीन नवंबर को शहर के किसी भी मतदान केंद्र पर टचस्क्रीन के जरिये हिंदी, गुजराती या उर्दू भाषा में अपना वोट डाल सकता है।

अमेरिका में भारतीय भाषाओं में मतदान सुविधाएं असमान

वहीं टेक्सस में, जहां 6.28 लाख से ज्यादा भारतीय-अमेरिकी रहते हैं। वहां मतदान के लिए किसी भी भारतीय भाषा की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

हाल ही में आई एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, न्यूयार्क के नसाऊ काउंटी और न्यू जर्सी के मिडलसेक्स काउंटी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी स्थिति निराशाजनक है।

फेडरल वोटिंग राइट्स एक्ट और राज्य के कानूनों के तहत मलयालम, गुजराती, हिंदी और पंजाबी जैसी भाषाओं में सहायता प्रदान करने के निर्देश हैं, लेकिन धरातल पर अनुदित मतपत्रों या दुभाषियों (इंटरप्रेटर्स) का भारी अभाव पाया गया है।

इसके विपरीत, कैलिफोर्निया के कई काउंटियों और न्यूयार्क के क्वींस तथा ब्रुकलिन जैसे इलाकों में बंगाली, पंजाबी और हिंदी के लिए बेहतर प्रबंध किए गए हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में हिंदी बोलने वाले वयस्कों की संख्या लगभग 8.91 लाख है, इसके अलावा उर्दू, तेलुगु, गुजराती और बंगाली बोलने वाले भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं।

हालांकि भारतीय-मूल के वयस्कों में अंग्रेजी की सीमित दक्षता का प्रतिशत कम (लगभग 16.7 प्रतिशत) है, फिर भी भाषा की यह बाधा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भागीदारी को प्रभावित करती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दिसंबर 2026 में आने वाले अमेरिकी जनगणना ब्यूरो के नए निर्धारण और आगामी नीतियों से यह स्पष्ट होगा कि आने वाले समय में भारतीय और दक्षिण एशियाई भाषाओं को चुनावी प्रक्रिया में कितना स्थान मिलता है। फिलहाल, मतदाता एपीआइए वोट की हेल्पलाइन (1-888-एपीआइ-वोट) के जरिये हिंदी, पंजाबी और उर्दू में मदद ले सकते हैं।

(समाचार एजेंसी आइएएनएस के इनपुट के साथ)

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