मिडटर्म चुनाव के बाद आव्रजन नीति का क्या होगा, नई कांग्रेस, लेकिन असली ताकत किसके पास?
एच-1बी कार्यक्रम भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। ट्रंप प्रशासन का 1 लाख डॉलर का शुल्क मैसाचुसेट्स और कैलिफोर्निया की अदालतों ने रोक दिया है।

एच-1बी कार्यक्रम भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है
HighLights
नीतियों को जमीन पर लागू करने की प्रशासनिक शक्ति
नई 120वीं कांग्रेस 3 जनवरी 2027 को कार्यभार संभालेगी
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेट्स ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट दोनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। इससे ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीतियों पर ज्यादा निगरानी की उम्मीद बढ़ गई है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि एच-1बी वर्कर्स, भारतीय छात्रों और एच-4 जीवनसाथी को जल्द राहत मिलने की संभावना कम है।
डेमोक्रेट्स ने सीनेट में कम से कम 54 सीटें और हाउस में प्रारंभिक गिनती के अनुसार कम से कम 231 सीटें जीती हैं। नई 120वीं कांग्रेस 3 जनवरी 2027 को कार्यभार संभालेगी।
इससे डेमोक्रेट्स को प्रशासन की नीतियों की जांच-पड़ताल करने का अधिकार मिल गया है, लेकिन राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेशों, घोषणाओं या नियमों को स्वतः रद करने की शक्ति नहीं मिली है।
आव्रजन वकील साइरस मेहता का कहना है कि राष्ट्रपति अभी भी कार्यकारी कार्रवाई के जरिए नियम और नीतियां जारी कर सकते हैं। कांग्रेस आईसीई के अतिरेक और डीएचएस की नस्लीय प्रोफाइलिंग की जांच कर सकती है, लेकिन प्रशासन अपनी आव्रजन एजेंडा जारी रखेगा।
मेहता का मानना है कि सीनेट में महत्वपूर्ण कानून पास करने के लिए आमतौर पर 60 वोटों की जरूरत होती है, जो आसान नहीं है।
जैक्सनविल आधारित वकील अश्विन शर्मा कहते हैं कि राष्ट्रपति की घोषणा को खुद राष्ट्रपति रद कर सकते हैं या अदालत खारिज कर सकती है।
नया बहुमत फंडिंग रोकने, जांच करने और सीनेट में नामांकन अस्वीकार करने की शक्ति रखता है, लेकिन आव्रजन एजेंडा को उलट नहीं सकता। अगले दो साल तक नीति पश्चिमी विंग में बनेगी और अदालतों में तय होगी।
एच-1बी पर क्या स्थिति
एच-1बी कार्यक्रम भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। ट्रंप प्रशासन का 1 लाख डॉलर का शुल्क मैसाचुसेट्स और कैलिफोर्निया की अदालतों ने रोक दिया है। प्रशासन ने घोषणा को सितंबर 2027 तक बढ़ा दिया है, लेकिन शुल्क अदालती आदेशों के तहत रुका हुआ है।