नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। इसमें कोई शक नहीं है कि तकनीकी क्रांति ने लोगों की जिंदगी आसान बना दी है, लेकिन जानकारी के अभाव में यही तकनीक लोगों को बड़ा नुकसान भी पहुंचा रही है। सैन फ्रांसिस्को की साइबर सिक्योरिटी कंपनी रिस्कआइक्यू ने इंटरनेट पर हैकिंग की वारदातों के बारे में एक रिपोर्ट जारी की है। इसके मुताबिक हैकर्स हर मिनट दुनिया की अर्थव्यवस्था से 10 लाख डॉलर से भी अधिक राशि चुराते हैं। तकरीबन दो हजार लोग हर मिनट साइबर अपराधों के शिकार बनते हैं। पिछले साल साइबर अपराधियों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को 600 अरब डॉलर की चपत लगाई थी।

कई मकसदों से होती है हैकिंग

शोधकर्ताओं ने पाया कि हैकर्स विभिन्न कारणों से हैकिंग की वारदात को अंजाम देते हैं। इसमें आर्थिक लाभ, राजनीतिक फायदा और जासूसी शामिल है। कंप्यूटरों में वायरस वाले सॉफ्टवेयर भेजकर, धोखाधड़ी से क्रेडिट और डेबिट कार्ड की जानकारी निकालकर और संस्था के नेटवर्क में सेंध मारकर जासूसी करने वाला कंपोनेंट डालकर हैकर्स साइबर अपराधों को अंजाम देते हैं।

बड़ा है खतरा

रिपोर्ट के मुताबिक अगर किसी कंपनी ने अपनी साइबर सिक्योरिटी को पुख्ता करने के लिए बड़ी राशि खर्च की है, तब भी वह खतरे के निशान पर हो सकती है। हैकर्स कंपनियों के सिस्टम में सेंध लगाकर ग्राहकों की निजी व गोपनीय जानकारी चुरा सकते हैं। हर दो मिनट में तीन संस्थाएं हैकिंग की शिकार बनती हैं और हरेक को लगभग 15,221 डॉलर का नुकसान होता है।

ऐसे सुरक्षित रखें अपनी ऑनलाइन जानकारी

- आर्थिक सेवाएं प्रदान करने वाली तकरीबन सभी संस्थाएं अपने ग्राहकों को फोन पर अलर्ट भेजने की सेवा प्रदान करती हैं। इन अलर्ट को सब्सक्राइब करने से आपको अपने क्रेडिट व डेबिट कार्ड से हुए लेन-देन की जानकारी तुरंत फोन पर मिल जाएगी।

- सार्वजनिक वाइफाइ के उपयोग से परहेज और फोन में स्क्रीन लॉक लगाने से आप फोन को हैकरों से बचा सकते हैं। अपने फोन में एंटी-मालवेयर डालना

भी कारगर कदम हो सकता है।

- अपने बैंक खाते या अन्य ऑनलाइन अकाउंट में लॉग-इन करने के लिए यूजरनेम और पासवर्ड के साथ कोई अन्य विकल्प भी रखें। जैसे कोई गोपनीय सवाल या कोई फिंगरप्रिंट वेरीफिकेशन।

- ऑनलाइन लेनदेन में सावधान रहें। अपने कार्ड पर ऑनलाइन खर्च की सीमा तय करना भी अच्छा कदम हो सकता है। ऑनलाइन लेनदेन के लिए भी आप फोन अलर्ट की सेवा चुन सकते हैं। 

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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