वाशिंगटन [प्रेट्र]। अमेरिका ने आरोप लगाया है कि भारत अपने चावल और गेहूं उत्पादक किसानों को बड़ी सब्सिडी दे रहा है। ऐसा करके वह व्यापार की नीति को विकृत कर रहा है।

कांग्रेस की समिति के समक्ष अमेरिका के चीफ एग्रीकल्चरल नेगोशिएटर ऑफिस के प्रतिनिधि ग्रेगरी दाउद ने यह टिप्पणी की। भारत की इस नीति से पूरी दुनिया के चावल और गेहूं उत्पादक देश चिंतित हैं। वह भारत के घरेलू किसानों के समर्थक रवैये से परेशान हैं।

मई में दाउद जिनेवा जाकर विश्व व्यापार संगठन के समक्ष इस बाबत अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं। अमेरिका का अनुमान है कि भारत अपने चावल उत्पादक किसानों को लागत में 74 से 84.2 प्रतिशत तक का सहयोग देता है। पिछले पांच साल में भारत ने 5.3 अरब डॉलर (38 हजार करोड़ रुपये) से आठ अरब डॉलर (57,500 करोड़ रुपये) के चावल का निर्यात किया है। वह चावल निर्यात करने वाला दुनिया का सबसे अग्रणी देश है। जबकि इसी दौरान भारत ने 1.9 अरब डॉलर (13,658 करोड़ रुपये) तक गेहूं का निर्यात किया है।

अमेरिका के कृषि कारोबार संबंधी मंत्रालय के सहायक मंत्री टेड मैकिनी ने हाल ही में भारत का दौरा कर खाद्य सुरक्षा नीति पर चर्चा की। इससे भारत से खाद्य पदार्थो का अमेरिका के लिए निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी। माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन अमेरिकी किसानों के लिए अवसर बढ़ाने के वास्ते लगातार कार्य कर रही है। इसीलिए वह अन्य देशों में कृषि उत्पादों पर दी जाने वाली सब्सिडी की समीक्षा कर रही है।

Posted By: Vikas Jangra