'ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम फिर से खड़ा कर रहा', पूर्व अमेरिकी जनरल की चेतावनी
अमेरिका और इजरायल के हमलों के बावजूद ईरान अपने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को तेजी से फिर से खड़ा कर रहा है।

ईरान के परमाणु ठिकाने की सैटेलाइट तस्वीर। (फाइल फोटो।)
HighLights
ईरान परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम फिर से कर रहा सक्रिय।
सेटेलाइट तस्वीरों में संवेदनशील स्थलों पर निर्माण कार्य दिखा।
IAEA ने ईरान की परमाणु गतिविधियों पर जताई गहरी चिंता।
डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। ईरान अपने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को फिर से खड़ा करने की कोशिशें तेज कर रहा है, भले ही अमेरिका और इजरायल ने उसके ठिकानों पर हमले किए हों। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि संवेदनशील जगहों पर निर्माण और किलेबंदी का काम चल रहा है।
अमेरिका के रिटायर्ड फोर-स्टार जनरल जैक कीन ने कहा है कि ईरान ने अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को नहीं छोड़ा है। उन्होंने तर्क दिया कि तनाव को और बढ़ने से रोकने के लिए चल रहे राजनयिक प्रयासों के बावजूद ईरान का शासन अपनी परमाणु क्षमताओं को बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है।
ईरान को बताया खतरनाक
कीन ने फॉक्स न्यूज से बात करते हुए ईरान को एक खतरनाक और दुष्ट शासन बताया और कहा, "उन्होंने निश्चित रूप से इसे छोड़ा नहीं है। यह उनके शासन की पहचान है।"
न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार, तेहरान ने अपने हथियारों से विरोधियों को होने वाले खतरे को समझते हुए अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू करने और बैलिस्टिक मिसाइल विकास में तेजी लाने का फैसला किया है। सैटेलाइट तस्वीरों से कई जगहों पर गतिविधियों का पता चला है, जिनमें नतांज परमाणु स्थल के पास स्थित पिकएक्स माउंटेन कॉम्प्लेक्स भी शामिल है।
बंकरों की सुरक्षा को किया मजबूत
माना जाता है कि यह भूमिगत सुविधा जमीन से 300 फीट से भी ज्यादा गहराई में बनी है। ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे को लेकर बनी चिंताओं के बीच यह एक बेहद संवेदनशील लक्ष्य बन गया है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, ईरान ने अपने परमाणु केंद्रों और सुरक्षा से जुड़े बंकरों की सुरक्षा को और मजबूत किया है।
इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी द्वारा सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से पता चला है कि तेहरान ने पिकएक्स माउंटेन और नतांज स्थलों के आसपास मिट्टी के अस्थायी टीले बनाए हैं ताकि जमीनी हमलों को मुश्किल बनाया जा सके।
विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थान द्वारा विश्लेषित उपग्रह चित्रों से पता चला है कि तेहरान ने संभावित जमीनी हमलों को मुश्किल बनाने के लिए पिकैक्स माउंटेन और नतान्ज स्थलों के आसपास अस्थायी मिट्टी के टीले बनाए थे।
हथियारों के जखीरे को भरने का काम
पुनर्निर्माण के प्रयास केवल परमाणु बुनियादी ढांचे तक ही सीमित नहीं हैं। ईरान ने सीधी लड़ाई में आए ठहराव का इस्तेमाल मिसाइल और ड्रोन सुविधाओं को बहाल करने और अपने हथियारों के जखीरे को फिर से भरने के लिए किया है। साथ ही अमेरिका द्वारा दोबारा हमले की स्थिति में अपनी सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया है।
ये घटनाक्रम ईरान की परमाणु गतिविधियों और उन पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच सामने आए हैं। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने ईरानी परमाणु सुविधाओं तक पहुंच न होने और वहां मौजूद परमाणु सामग्री के बारे में अपर्याप्त जानकारी की समस्या से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था ने अपनी नवीनतम तिमाही रिपोर्ट में कहा है कि पहुंच और जानकारी न मिल पाने से परमाणु प्रसार को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं। यह चिंता विशेष रूप से इस्फहान स्थित उस केंद्र को लेकर है, जिसे अमेरिका और इजरायल के हमलों में निशाना बनाया गया था।
IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने लंबे समय से चले आ रहे विवादों को एक स्थायी और सत्यापन योग्य राजनयिक समझौते के जरिए सुलझाने का आह्वान किया है। हालांकि, तेहरान ने जोर देकर कहा है कि सैन्य हमलों में क्षतिग्रस्त हुए स्थलों का निरीक्षण, विशेष रूप से तय की गई प्रक्रियाओं के अनुसार ही होना चाहिए।
जून 2025 में अपनी परमाणु सुविधाओं पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने एजेंसी के साथ सहयोग निलंबित कर दिया था। हालांकि, बाद में उसने संकेत दिया कि तय की गई व्यवस्थाओं के तहत निरीक्षक वापस आ सकते हैं।
