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'बेहद दिलचस्प', ट्रंप का दावा- ईरान परमाणु हथियार न रखने को राजी

Published: Sun, 31 May 2026 02:58 PM (IST)

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने परमाणु हथियार विकसित न करने की गारंटी दी है, जबकि उन्होंने तेहरान को एक "और सख्त" प्रस्ताव भेजा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप। (फाइल फोटो)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप। (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान से यह गारंटी हासिल कर ली है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। यह बात ऐसे समय सामने आई है जब ऐसी खबरें आ रही हैं कि उन्होंने तेहरान को शांति का एक और भी सख्त प्रस्ताव वापस भेजा है।

प्रस्ताव में किसी भी तरह के बदलाव से मिडिल-ईस्ट युद्ध को औपचारिक रूप से समाप्त करने और होर्मुज स्ट्रेट के समुद्री मार्ग को खोलने के समझौते में और भी अधिक देरी हो सकती है। जबकि तीखी बयानबाजी और कभी-कभार भड़कने वाले सशस्त्र संघर्षों के बावजूद इस समझौते को पक्का करने के लिए हफ्तों से प्रयास किए जा रहे हैं।

ट्रंप ने फिर से भेजा नया मसौदा

न्यूयॉर्क टाइम्स और Axios मीडिया आउटलेट्स ने शनिवार को रिपोर्ट दी कि ट्रंप ने ईरान के विचारार्थ एक नया मसौदा "और भी सख्त" शर्तों के साथ वापस भेजा है, हालांकि यह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सका कि इसमें क्या शामिल था।

ट्रंप ने कहा है कि किसी भी समझौते के लिए उनकी प्राथमिकताओं में ईरान को किसी भी परमाणु हथियार के विकास से रोकना और अवरुद्ध स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना शामिल है।

उन्होंने शनिवार रात को अपनी बहू लारा ट्रंप को एक इंटरव्यू में बताया, "मुझे एक गारंटी जरूर चाहिए और वह यह है कि वहां कोई परमाणु हथियार नहीं होंगे। वे इस बात पर सहमत हो गए हैं और यह बहुत दिलचस्प था।"

ईरान ने ट्रंप के दावे पर जताया संदेह

लेकिन तेहरान ने पहले भी ट्रंप के दावों पर संदेह जताया है और ऐसा लग रहा है कि दोनों पक्ष अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं को लेकर एक-दूसरे से काफी दूर हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार, ईरान ने कहा है कि अपने परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर ठोस बातचीत शुरू करने से पहले उसे अपनी 12 अरब डॉलर की फ्रीज की गई संपत्तियों की रिहाई की जरूरत है।

साथ ही उसने ट्रंप की उन पिछली टिप्पणियों को "बेबुनियाद" बताया है जिनमें कहा गया था कि उसका एनरिच्ड यूरेनियम नष्ट कर दिया जाएगा। तेहरान ने इस बात पर भी जोर दिया है कि चल रही लड़ाई के बावजूद युद्ध के किसी भी अंत में लेबनान को शामिल किया जाना चाहिए।

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