डेनमार्क से डील के बाद ग्रीनलैंड पर US को मिला 'परमानेंट कंट्रोल', रूस-चीन नहीं बना सकेंगे सैन्य अड्डा
ट्रंप ने डेनमार्क के साथ एक समझौते की घोषणा की, जिससे अमेरिका को ग्रीनलैंड की सुरक्षा पर स्थायी नियंत्रण मिल गया है।

ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर डेनमार्क से की डील
HighLights
अमेरिका को ग्रीनलैंड की सुरक्षा पर स्थायी नियंत्रण मिला।
समझौता रूस और चीन को आर्कटिक में बेस बनाने से रोकेगा।
वाशिंगटन ग्रीनलैंड में बड़ी सैन्य मौजूदगी बनाना शुरू करेगा।
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार, 18 सितंबर को डेनमार्क के साथ हुए एक समझौते के बारे में जानकारी दी।
ट्रंप ने बताया इस समझौते से वाशिंगटन को ग्रीनलैंड की सुरक्षा पर 'स्थायी नियंत्रण' मिल जाएगा। ग्रीनलैंड पर अमेरिका के स्थायी नियंत्रण से ट्रंप, रूस और चीन को आर्कटिक क्षेत्र में अपने बेस बनाने से रोक सकते हैं।
अमेरिका-डेनमार्क के बीच समझौता
ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, 'मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने डेनमार्क साम्राज्य और ग्रीनलैंड के साथ एक समझौता किया है, जिससे अमेरिका को ग्रीनलैंड में सुरक्षा और अन्य सभी जरूरतों पर स्थायी नियंत्रण मिल जाएगा।'
ट्रंप ने अमेरिका के दुश्मनों को चेतावनी देते हुए लिखा, 'अब से, अमेरिका का कोई भी दुश्मन हमारी स्पष्ट लिखित मंजूरी के बिना ग्रीनलैंड में कभी भी बेस नहीं बना पाएगा, वहां अपनी सैन्य मौजूदगी नहीं रख पाएगा और न ही वहां संवेदनशील निवेश कर पाएगा।'
ट्रंप ने डेनमार्क के साथ हुए समझौते पर लिखा, 'यह एक अनंत काल का समझौता है, इसका कोई अंत नहीं है! वाशिंगटन तुरंत इस क्षेत्र में बड़ी सैन्य मौजूदगी बनाना शुरू कर देगा।'
ग्रीनलैंड पर अमेरिका का कब्जा
जनवरी 2025 से ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप बार-बार कहते आए हैं कि रणनीतिक कारणों से अमेरिका को ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की जरूरत है। वेनेजुएला पर हमले के बाद ट्रंप ने ग्रीनलैंड की तरफ रुख किया था।
कोपेनहेगन के नियंत्रण वाला स्वायत्त क्षेत्र डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ने अमेरिका के समझौते का स्वागत किया और कहा कि वे अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में UN जनरल असेंबली के दौरान इस पर हस्ताक्षर करेंगे।
ट्रंप ने चीन-रूस को रोका
ट्रंप ने बार-बार चेतावनी दी है कि गर्म होते आर्कटिक में वर्चस्व की रणनीतिक लड़ाई के बीच रूस और चीन ग्रीनलैंड में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। विदेश विभाग ने भी साफ कर दिया कि उन्हें ऐसा करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
विदेश विभाग के एक अधिकारी ने कहा, 'यह समझौता गारंटी देता है कि चीन और रूस, ग्रीनलैंड में बेस नहीं बना पाएंगे, वे ग्रीनलैंड में सैनिक नहीं भेज पाएंगे और संवेदनशील क्षेत्रों में निवेश को रोकने के लिए जरूरी तंत्र मौजूद हैं।'
