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सिर्फ एक हफ्ते में परमाणु बम बना सकता है ईरान? अमेरिका का बड़ा दावा; ट्रंप की बढ़ी चिंता

Published: Sun, 22 Feb 2026 07:26 PM (IST)

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने दावा किया कि ...और पढ़ें

क्या ईरान एक हफ्ते में बना सकता है परमाणु बम अमेरिका की नई चेतावनी (फाइल फोटो)

क्या ईरान एक हफ्ते में बना सकता है परमाणु बम अमेरिका की नई चेतावनी (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने दावा किया है कि ईरान सैद्धांतिक रूप से सिर्फ एक हफ्ते में बम-ग्रेड यूरेनियम तैयार कर सकता है।

हालांकि उन्होंने यह भी साफ नहीं किया कि फिलहाल ईरान के पास इसके लिए जरूरी सामग्री, उपकरण या सक्रिय हथियार कार्यक्रम है या नहीं।

'एक हफ्ते दूर' का दावा

फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में स्टीव विटकॉफ ने कहा कि ईरान शायद एक हफ्ते दूर है इंडस्ट्रियल स्तर का बम बनाने लायक यूरेनियम तैयार करने से। उन्होंने इसे खतरनाक बताया और कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान को यूरेनियम संवर्धन की अनुमति मिले।

जून 2025 में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था। इस अभियान को 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' कहा गया। इन हमलों में लगभग 20,000 सेंट्रीफ्यूज नष्ट करने, हथियार कार्यक्रम को खत्म करने और तीन बड़े परमाणु स्थलों को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया गया था। इन हमलों में कई प्रमुख परमाणु वैज्ञानिकों के मारे जाने और यूरेनियम भंडार तक पहुंच मुश्किल होने की भी बात कही गई थी।

जून 2025 के हमले

हमलों से पहले आकलन था कि अगर ईरान चाहे तो वह लगभग एक हफ्ते में हथियार-ग्रेड यूरेनियम तैयार कर सकता था। लेकिन उसे मिसाइल में फिट करने और बम तैयार करने में तीन से छह महीने और लग सकते थे।

पहले यह समयसीमा करीब दो साल मानी जाती थी, लेकिन बाद में यह तेजी से घट गई थी। इसी वजह से इजरायल की चिंता बढ़ गई थी कि कहीं ईरान चुपचाप परमाणु सीमा पार न कर जाए।

फिलहाल अमेरिका और इजरायल का मानना है कि ईरान को परमाणु ताकत बनने में कम से कम दो साल लग सकते हैं। यह आकलन बेंजामिन नेतन्याहू सरकार और वॉशिंगटन दोनों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

'जीरो एनरिचमेंट' पर अड़ा अमेरिका

विटकॉफ ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के साथ समझौते में “जीरो एनरिचमेंट” यानी बिल्कुल भी यूरेनियम संवर्धन की अनुमति नहीं चाहते। हालांकि रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन सीमित और सख्त निगरानी में नागरिक उपयोग के लिए एनरिचमेंट पर विचार कर सकता है। विटकॉफ ने यह भी कहा कि ट्रंप नाराज नहीं बल्कि जिज्ञासु हैं कि भारी अमेरिकी सैन्य दबाव के बावजूद ईरान ने समझौता क्यों नहीं किया।

इस बीच ईरान में फिर से विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। छात्रों ने सड़कों पर उतरकर इस्लामिक शासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। विटकॉफ ने निर्वासित शहजादे रेजा पहलवी का जिक्र करते हुए कहा कि वह अपने देश की परवाह करते हैं, लेकिन ईरान का भविष्य ट्रंप की नीतियों पर ज्यादा निर्भर करेगा।

हिज्बुल्लाह पर IRGC की सीधी निगरानी

अरब मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लेबनान में हिज़्बुल्लाह की सैन्य तैयारियों की निगरानी अब सीधे ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कर रही है। बताया जा रहा है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर्प्स के अधिकारी हाल ही में लेबनान पहुंचे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, ये अधिकारी सिर्फ सैन्य ढांचे के पुनर्निर्माण की निगरानी ही नहीं कर रहे, बल्कि रणनीतिक युद्ध योजनाओं को सीधे मैनेज भी कर रहे हैं। इन घटनाओं से संकेत मिलते हैं कि ईरान और उसके सहयोगी संभावित इजरायली या अमेरिकी हमले की आशंका को देखते हुए तैयारी कर रहे हैं। इससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

ईरान ने ईयू सदस्य देशों की नौसेना और वायु सेना को आतंकी संगठन घोषित किया

इधर, ईरान ने यूरोपीय संघ (EU) के सदस्य देशों की नौसेना और वायु सेना को आतंकी संगठन घोषित कर दिया है। यह कदम ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गा‌र्ड्स का‌र्प्स को आतंकवादी संगठन घोषित करने के यूरोपीय संघ के हालिया फैसले के जवाब में उठाया गया है।

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने राष्ट्रीय लचीलेपन और एकता के प्रति अपने प्रशासन की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि ईरान अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता के दौरान बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।उन्होंने कठिनाइयों को स्वीकार करते हुए राष्ट्रीय एकता का आह्वान किया और ईरानियों से मतभेदों को भुलाकर एकजुट रहने का आग्रह किया।

पेजेश्कियन की ये टिप्पणियां पश्चिम एशिया में हाल ही में अमेरिका द्वारा की गई सैन्य तैनाती में वृद्धि और वाशिंगटन और तेहरान के बीच हुई अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता के दो दौर के बाद आई हैं। इनमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने की संभावना पर चर्चा हुई थी।

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