क्या सचमुच धूमकेतुओं ने पृथ्वी पर शुरू किया था जीवन? नई रिसर्च ने खारिज किया पुराना सिद्धांत; जानिए क्या है सच
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के नए शोध ने उस पुरानी थ्योरी को चुनौती दी है जिसके अनुसार धूमकेतुओं ने धरती पर जीवन के लिए आवश्यक रासायनिक तत्व पहुंचाए थे।

(AI से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर)
HighLights
कैम्ब्रिज शोध ने धूमकेतु-जीवन सिद्धांत को चुनौती दी।
तेज टक्कर से जीवन रसायन नष्ट होने का दावा।
हाइड्रोजन साइनाइड धरती पर पहुंचना मुश्किल।
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। वैज्ञानिकों के बीच लंबे समय से यह थ्योरी लोकप्रिय रही है कि अंतरिक्ष से आने वाले धूमकेतुओं ने ही धरती पर उन रासायनिक तत्वों को पहुंचाया होगा, जिनकी वजह से हमारी धरती पर जीवन की शुरुआत हुई। लेकिन अब कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की एक नई स्टडी ने इस पुरानी थ्योरी पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
बता दें कि यह रिसर्च रिचर्ड एंसलो के नेतृत्व में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने की है, जो कि प्रतिष्ठित जर्नल वैज्ञानिक रिपोर्टें में 28 अक्टूबर को प्रकाशित हुई थी।
इस रिसर्च में नया दावा क्या है?
इस रिसर्च में किए गए नए दावों में बताया गया है कि धूमकेतुओं की अत्यधिक गति के कारण होने वाली भीषण टक्कर से जीवन के लिए जरूरी रसायन जैसे हाइड्रोजन साइनाइड नष्ट हो जाते हैं। इसलिए उनका धरती पर सुरक्षित पहुंचना बेहद मुश्किल था।
क्या कहती है नई रिसर्च?
इस स्टडी के मुख्य शोधकर्ता रिचर्ड एंसलो और उनकी टीम ने एक लाख कंप्यूटर सिमुलेशन के जरिए यह जांच की कि क्या धूमकेतु धरती पर हाइड्रोजन साइनाइड (HCN) की पर्याप्त मात्रा पहुंचा सकते थे। गौर करने वाली बात यह है कि हाइड्रोजन साइनाइड एक ऐसा अहम यौगिक है, जिसे जीवन के बुनियादी निर्माण खंडों के लिए बहुत जरूरी माना जाता है।
स्टडी के नतीजे हैरान करने वाले थे
इस नए स्टडी के अनुसार एक लाख में से 54 प्रतिशत सिमुलेशन में ऐसा एक भी मामला सामने नहीं आया जहां धूमकेतु ने जीवन के लिए जरूरी रसायन की सही मात्रा सफलतापूर्वक धरती तक पहुंचाई हो।
शोधकर्ताओं के अनुसार, जब धूमकेतु बहुत तेज रफ्तार से धरती से टकराते हैं, तो टक्कर की भीषण गर्मी और ऊर्जा से ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल्स टिक नहीं पाते और नष्ट हो जाते हैं।
बेहद दुर्लभ थे सफल मौके
इसके साथ ही बड़ी बात यह है कि केवल 46 प्रतिशत सिमुलेशन में ही कम से कम एक बार सफल डिलीवरी की संभावना दिखी, लेकिन बार-बार ऐसा होने की उम्मीद लगभग न के बराबर थी।
आखिर धूमकेतु होते क्या हैं?
NASA के अनुसार, धूमकेतु ऐसे छोटे आकाशीय पिंड हैं जो मुख्य रूप से जमी हुई गैसों, पानी की बर्फ, धूल, चट्टान और कार्बनिक यौगिकों से बने होते हैं। इन्हें अक्सर गंदे बर्फ के गोले कहा जाता है। ये करीब 4.6 अरब साल पहले हमारे सौर मंडल के बनने के समय के बचे हुए अवशेष हैं।
कहां से आते हैं धूमकेतु?
नासा के अनुसार ज्यादातर धूमकेतु हमारे सौर मंडल के दो दूरदराज इलाकों कुइपर बेल्ट और ऊर्ट क्लाउड से आते हैं।
पूंछ क्यों बनती है?
इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि जब ये सूरज के करीब आते हैं, तो इनकी बर्फ पिघलकर गैस बनने लगती है और धूल के कण बाहर निकलते हैं, जिससे आसमान में एक चमकीला बादल और लंबी पूंछ जैसी संरचना बन जाती है।
क्या धूमकेतु जानबूझकर धरती पर गिरते हैं?
बिल्कुल नहीं.. धूमकेतु कभी भी अपनी मर्जी से धरती की तरफ नहीं आते। बृहस्पति और नेप्च्यून जैसे बड़े ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण कभी-कभी इनके रास्ते बदल जाते हैं। यदि रास्ता बदलते-बदलते कोई धूमकेतु आंतरिक सौर मंडल में आ जाए और उसका रास्ता धरती के रास्ते को काट दे, तो टक्कर की संभावना बनती है।
हालांकि, ऐसी भयंकर टक्करें बहुत दुर्लभ होती हैं। ज्यादातर धूमकेतु बिना नुकसान पहुंचाए अंतरिक्ष से गुजर जाते हैं, और जो छोटे कण पीछे छूट जाते हैं, वे धरती के वायुमंडल में आते ही जल जाते हैं, जिन्हें हम टूटते हुए तारे या उल्कापात के रूप में देखते हैं।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।