वाशिंगटन [द न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स]। कोरोना वायरस की जानकारी देने वालों को पहले चुप कराया, दुनिया की नजरों से इससे जुड़ी अहम सूचनाओं को छिपाया, नए कोरोना वायरस के खतरों को कमतर बताया और इसे महामारी में बदलने दिया, जिससे लगभग तीन हजार लोगों की मौत हो गई और अब अपनी छवि सुधारने में जुट गया है चीन। इस वायरस के खतरों को समझ पाने और उससे निपटने में सरकार की नाकामी को लेकर चीन के लोगों में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है।

कोरोना वायरस से चीन में रोजाना लोगों की मौत हो रही है, संक्रमित लोगों की संख्या दिन पर दिन बढ़ रही है और कम्युनिस्ट पार्टी को अपनी बिगड़ती छवि की चिंता खाए जा रही है। पार्टी न सिर्फ अपनी ब्रांडिंग में जुट गई है, बल्कि वह खुद को इस वायरस से लड़ने में सक्षम विश्व के अगुआ के रूप में स्थापित करने में भी जुटी है।

सरकारी मीडिया इस महामारी के खिलाफ चीन के कदमों को दुनिया में अन्य देशों के लिए एक आदर्श के रूप में प्रस्तुत कर रही है। अमेरिका और दक्षिण कोरिया जैसे देशों पर इस महामारी के प्रसार को रोकने में सुस्त तरीके से काम करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। ग्लोबल टाइम्स ने हाल ही में एक खबर प्रकाशित की थी, जिसका शीर्षक ही यह था कि इस बीमारी को रोकने में कुछ देशों ने बहुत ठंडी प्रतिक्रिया जताई।

सरकार के नियंत्रण वाले समाचार माध्यमों पर हैशटैग के साथ खबरें चलाई जा रही हैं कि इस बीमारी से निपटने का चीनी तरीका ही सबसे कारगर तरीका है। कम्युनिस्ट पार्टी के नेता इस संकट को भी चीन की प्रशासनिक व्यवस्था और उसके कट्टरपंथी नेता शी चिनफिंग की ताकत के उदाहरण के तौर पर पेश करने की कोशिशों में जुटे हैं। कोरोना वायरस के संकट पर छह भाषाओं में पुस्तिका प्रकाशित करने की घोषणा तक कर दी गई है, जिसमें चिनफिंग को लोगों की फिक्र करने वाले नेता के रूप में पेश करने की योजना है। 

Posted By: Krishna Bihari Singh

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