वाशिंगटन (प्रेट्र)। कुछ दिन पहले जापानी वैज्ञानिकों ने जीन एडिटिंग की मदद से फूल का रंग बदलने में सफलता हासिल की थी। अब एक कदम आगे बढ़ते हुए अमेरिकी वैज्ञानिक तितलियों के पंखों का रंग बदलने में कामयाब हुए हैं। उन्होंने तितलियों के उस एक जीन की पहचान की जो कुदरती रूप से उनके पंखों का पैटर्न निर्धारित करता है। इसके बाद उसमें तब्दीली कर उन्होंने उस पैटर्न को बदल दिया।

पनामा के स्मिथसोनियन ट्रोपिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसटीआरआइ) के वैज्ञानिक ओवेन मैकमिलन के मुताबिक, तितलियों के पंखों का पैटर्न कुदरती रूप से अद्भुत और विविधता से भरा होता है। जिनेटिक इंजीनिर्यंरग के जरिए हम उनकी विभिन्न प्रजातियों में इसकी विविधता का कारण समझने में सफल हुए। हमने पाया कि जीन्स के एक छोटे परिवार का हिस्सा डब्ल्यूएनटीए जीन उनके विकसित होने के दौरान उनकी शारीरिक संरचना और पैटर्न को प्रभावित करता है।

प्रोसीडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया कि शोधकर्ताओं ने जिनेटिक कोड से जुड़े एक आरएनए की जांच के लिए तितलियों के अंडों को डब्ल्यूएनटीए जीन में इंजेक्ट किया। मैकमिलन के मुताबिक, ये बेहद जटिल प्रक्रिया थी, क्योंकि वास्तव में इससे जीन्स का पूरा नेटवर्क बदलता है। जरा भी गड़बड़ी से पूरी प्रक्रिया खराब हो सकती थी। इसके अलावा तितलियों के विकसित होने के दौरान ही यह प्रयोग किया जा सकता था क्योंकि तभी उनके पंखों का पैटर्न निर्धारित होता है, बाद में नहीं।

एसटीआरआइ और कैंब्रिज से पोस्टडॉक्टोरल फेलो रिचर्ड वालबैंक के मुताबिक, एक बार जीन की पहचान करने के बाद हम तितलियों के बढ़ने के दौरान उनके पंखों का पैटर्न बदलने में समक्ष हो गए। दल ने इस प्रक्रिया को तितलियों की सात प्रजातियों में दोहराया और फिर परिणामों की तुलना की। इसमें शोधकर्ताओं ने डब्ल्यूएनटीए जीन को पंखों का पैटर्न बदलने के लिए अनापेक्षित तरीके से प्रभावित करते हुए देखा।

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Posted By: Srishti Verma

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