वाशिंगटन, एजेंसी। अमेरिका में बाइडन सरकार ने मध्यावधि  चुनाव के पहले बड़ा कदम उठाया है। इस क्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने मंगलवार को डेमोक्रेटिक पार्टी के ऐतिहासिक जलवायु परिवर्तन व स्वास्थ्य देखभाल विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिया। इस कानून में स्वास्थ्य बीमा सब्सिडी विस्तार तथा दवा की कीमत व महंगाई कम करने के प्रविधान शामिल हैं। बाइडन मध्यावधि चुनाव से पहले मतदाताओं को यह जताना चाहते हैं कि डेमोक्रेटिक पार्टी उनके साथ खड़ी है। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव में तीन महीने से भी कम समय बचा है।

जलवायु परिवर्तन से मुकाबले के लिए खर्च होंगे 375 अरब डालर

न्यूज एजेंसी एपी के अनुसार कानून में जलवायु परिवर्तन से मुकाबले के लिए अबतक के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण संघीय निवेश शामिल है। इसके तहत एक दशक में 375 अरब डालर खर्च किए जाएंगे। सरकार मेडिकेयर से जुड़े लोगों की दवाओं पर होने वाले खर्च के मद में दो हजार डालर तक वार्षिक भुगतान कर सकेगी। यह कानून लगभग 1.3 करोड़ अमेरिकियों को कोरोना महामारी के दौरान प्रदान की जाने वाली सब्सिडी का विस्तार करके स्वास्थ्य देखभाल बीमा के लिए भुगतान करने में भी मदद करेगा।

बड़ी कंपनियों पर नए कर लगाकर तथा संपन्न लोगों व संस्थाओं के आंतरिक राजस्व सेवा (आइआरएस) प्रवर्तन को बढ़ाकर योजनाओं के लिए धन जुटाया जाएगा। इस कानून को दो ट्रिलियन बिल्ड बैक बेटर एक्ट का लघु संस्करण माना जा रहा है, जिसकी घोषणा बाइडन ने पद संभालने के तुरंत बाद की थी। व्हाइट हाउस में हस्ताक्षर कार्यक्रम में बाइडन ने कहा, 'इस ऐतिहासिक क्षण में डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकियों का पक्ष लिया, जबकि हर रिपब्लिकन ने संसद में मतदान के दौरान विशेष हितों से पक्षपात किया।' सदन ने शुक्रवार को 207 के मुकाबले 220 मतों से इस विधेयक को पारित कर दिया था। रिपब्लिकन पार्टी ने नए कर से कीमतों में वृद्धि की आशंका जताते हुए इस कानून का विरोध किया था।

जलवायु नीति को लेकर ट्विटर पर भिड़े चीन व अमेरिका 

जलवायु नीति को लेकर अमेरिका व चीन में ट्विटर पर भिड़ंत हो गई। दरअसल, चीन में अमेरिका के राजदूत निकोलस ब‌र्न्स ने रविवार को ट्वीट किया था कि अमेरिका जलवायु परिवर्तन से मुकाबले के लिए अबतक का सबसे बड़ा निवेश कर रहा है और चीन को भी ऐसा करना चाहिए। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को ट्वीट किया, 'सुनकर अच्छा लगा। लेकिन, अमेरिका क्या इसके प्रविधानों को लागू कर सकता है?' उल्लेखनीय है कि ताइवान के मुद्दे पर दोनों देशों के संबंधों में तल्खी आ गई है और चीन ने जलवायु समेत कई मुद्दों पर संवाद निलंबित कर दिया है।

Edited By: Monika Minal