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आर्टेमिस 2 मिशन: अंतरिक्षयात्रियों ने पृथ्वी की कक्षा छोड़ी, चंद्रमा की ओर बढ़े

Published: Fri, 03 Apr 2026 11:26 PM (IST)

नासा के आर्टेमिस-2 मिशन के तहत ओरियन कैप्सूल में सवार अंतरिक्षयात्रियों ने पृथ्वी की कक्षा छोड़कर चंद्रमा की ओर कूच ...और पढ़ें

चांद की ओर बढ़े आर्टेमिस 2 के अंतरिक्षयात्री। (नासा)

चांद की ओर बढ़े आर्टेमिस 2 के अंतरिक्षयात्री। (नासा)

HighLights

  1. आर्टेमिस-2 अंतरिक्षयात्री पृथ्वी की कक्षा छोड़कर चंद्रमा की ओर रवाना।

  2. 1972 के बाद पहली बार इंसान चंद्रमा के इतने करीब जा रहा।

  3. 2030 तक चंद्रमा पर स्थायी चौकी बनाने का अमेरिकी विधेयक पेश।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नासा के आर्टेमिस-2 मिशन के तहत ओरियन कैप्सूल पर सवार अंतरिक्षयात्रियों ने पृथ्वी की कक्षा छोड़कर चार लाख किलोमीटर दूर चंद्रमा की तरफ कूच कर दिया है। लॉन्चिंग के 25 घंटे बाद ट्रांसलूनर इग्निशन की प्रक्रिया पूरी की गई।

पृथ्वी के कक्षा को छोड़कर चांद की तरफ जाने के लिए इंजन फायर करने की प्रक्रिया को 'ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न' कहते हैं। इस दौरान इंजन ने कैप्सूल को 38 हजार किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति दी, जिससे वह पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकल गया। 1972 के अपोलो 17 मिशन के बाद पहली बार इंसान चंद्रमा के इतने करीब जा रहा है। अपोलो 17 नासा का अंतिम मिशन था जब मनुष्य ने चंद्रमा पर कदम रखा था।

गौरतलब है कि ओरियन कैप्सूल में सवार होकर तीन अमेरिकी अंतरिक्षयात्री और एक कनाडाई अंतरिक्षयात्री बुधवार को चंद्रमा के सफर पर रवाना हुए। इनमें नासा से रीड वाइजमैन, अश्वेत अंतरिक्षयात्री विक्टर ग्लोवर, महिला अंतरिक्षयात्री क्रिस्टीना कोच और कनाडा के अंतरिक्ष संगठन से जेरेमी हैंसन शामिल हैं।

गुरुवार को अंतरिक्षयात्रियों ने हजारों मील की ऊंचाई से पृथ्वी का निहारा। कोच ने मिशन कंट्रोल को बताया कि उन्होंने महाद्वीपों यहां तक कि दक्षिणी ध्रुव को भी देखा। मिशन के दौरान अंतरिक्षयात्री चंद्रमा के पास से तेजी से गुजरेंगे, यू-टर्न लेंगे और धरती पर लौट आएंगे। इस मिशन में अंतरिक्षयात्री चांद की सतह पर नहीं उतरेंगे।

इस प्रक्रिया में, अंतरिक्षयात्री अंतरिक्ष में लगभग चार लाख छह हजार किमी की दूरी तक जाएंगे - जो कि मानव द्वारा अब तक किया गया सबसे लंबा सफर होगा। लगभग 248,000 मील की दूरी तक अंतरिक्ष में पहुंचने का वर्तमान रिकार्ड 1970 में अपोलो 13 चंद्र मिशन के तीन सदस्यीय दल के पास है।

कनाडाई अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन ने बताया कि जब वे पृथ्वी को छोड़ रहे थे तो वह और उनके साथी कैप्सूल की खिड़कियों से अद्भुत नजारों का लुत्फ उठा रहे थे। ग्लोवर, कोच और हैनसेन पहले ही इतिहास रच चुके हैं। ग्लोवर चंद्रमा पर जाने वाले पहले अश्वेत हैं जबकि क्रिस्टीना कोच पहली महिला और हैनसेन पहले गैर-अमेरिकी नागरिक हैं।

2030 तक चंद्रमा पर स्थायी चौकी बनाने के लिए अमेरिका में विधेयक पेश

आईएएनएस के अनुसार, 2030 तक चंद्रमा पर स्थायी चौकी बनाने के लिए अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य ने विधेयक पेश किया गया है। विधेयक में नासा को 2030 तक चांद पर स्थायी चौकी स्थापित करने का निर्देश देने का प्रविधान है। कांग्रेस सदस्य कीथ सेल्फ ने इस विधेयक को आर्टेमिस 2 मिशन के लांच होने के एक दिन बाद पेश किया। इस विधेयक में मौजूदा अमेरिकी अंतरिक्ष कानून में संशोधन का प्रविधान है।

विधेयक में चंद्रमा पर पहले अंतरिक्ष चौकी की स्थापना के लिए 31 दिसंबर, 2030 की समय सीमा निर्धारित की गई है। कीथ सेल्फ ने कहा, अगर हम अंतरिक्ष में अमेरिकी नेतृत्व को बनाए रखने पर गंभीर हैं, तो हमें चंद्रमा पर स्थायी रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। इसमें नासा प्रशासक को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर प्रारंभिक बुनियादी ढांचा स्थापित करने का निर्देश देने प्रविधान है।

यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इस क्षेत्र के बर्फ को रॉकेट ईंधन में बदला जा सकता है। इस क्षेत्र में हीलियम-3 और रेयर अर्थ तत्वों के भंडार भी हैं। सेल्फ ने चंद्र अभियान को आर्थिक और रणनीतिक दोनों ही रूप से अनिवार्य बताया।

उन्होंने कहा, चंद्र संसाधन अंतरिक्ष विनिर्माण, खनन और निर्माण की अगली पीढ़ी को गति देंगे। यह विधेयक चीन के राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच पेश किया गया है। चीन ने इस दशक के अंत से पहले चंद्रमा पर अनुसंधान स्टेशन स्थापित करने की योजना की रूपरेखा तैयार की है।

सेल्फ ने कहा, चंद्रमा के संसाधनों पर अंतरराष्ट्रीय कानून अनिश्चित है। जो राष्ट्र सतह पर पहले पहुंचेगा, वही बाकी सभी के लिए नियम तय करेगा। स्थायी चौकी से देश में आर्थिक लाभ होगा। हमारे पास आगे बढ़ने का सुनहरा अवसर है। यह विधेयक पहले नासा पुनप्र्राधिकरण अधिनियम के हिस्से के रूप में पेश किया गया था और फरवरी में समिति से पारित हो गया था, जिसके बाद इसे अलग विधेयक के रूप में फिर से पेश किया गया।

(समाचार एजेंसी एपी के इनपुट के साथ)